भारत और दक्षिण कोरिया अब हाथ मिलाकर दुनिया में अपनी पकड़ मजबूत करेंगे। पीएम नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे मयंग के बीच हुई मुलाकात में कई बड़े समझौतों पर मुहर लगी है। दोनों देशों ने तय किया है कि वे ऊर्जा सप्लाई चेन को सुरक्षित रखेंगे ताकि पश्चिम एशिया के तनाव का असर आम जनता पर न पड़े।

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दोनों देशों के बीच किन बड़े क्षेत्रों में होगा काम

  • शिपबिल्डिंग: कोरिया की तकनीक और भारत की सरकारी मदद से जहाजों का निर्माण बढ़ाया जाएगा।
  • फाइनेंस: कोरियाई बैंक अब भारतीय बाजार में आएंगे और फिनटेक सेवाओं को बेहतर किया जाएगा।
  • AI और डिजिटल: इंडिया के टैलेंट और कोरिया के इंफ्रास्ट्रक्चर को जोड़कर एक डिजिटल ब्रिज बनाया जाएगा।
  • व्यापार: साल 2030 तक आपसी व्यापार को बढ़ाकर 50 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा गया है।

पश्चिम एशिया के तनाव और ऊर्जा सप्लाई पर क्या चर्चा हुई

दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता पर चिंता जताई और कहा कि दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए शांति जरूरी है। राष्ट्रपति ली जे मयंग ने कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जहाजों का सुरक्षित निकलना बहुत जरूरी है। इसके लिए भारत और दक्षिण कोरिया मिलकर ऊर्जा सप्लाई के नए रास्ते खोजेंगे ताकि तेल और गैस की किल्लत न हो।

क्षेत्र लक्ष्य या समझौता
द्विपक्षीय व्यापार 2030 तक 50 अरब डॉलर का लक्ष्य
शिपबिल्डिंग कोरियाई तकनीक और भारतीय इंसेंटिव का मेल
डिजिटल सहयोग डिजिटल ब्रिज फ्रेमवर्क का निर्माण
सुरक्षा हॉर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित करना
फाइनेंस भारतीय बाजार में कोरियाई संस्थानों का प्रवेश
Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.