भारत और दक्षिण कोरिया ने पर्यावरण को बचाने और जलवायु परिवर्तन जैसी बड़ी समस्याओं से लड़ने के लिए हाथ मिलाया है। 20 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे मियुंग के बीच एक अहम बैठक हुई। इस मुलाकात में दोनों देशों ने समुद्र की सुरक्षा, आर्कटिक रिसर्च और सस्टेनेबिलिटी पर मिलकर काम करने का फैसला किया है।

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इन समझौतों से क्या होगा फायदा?

दोनों देशों ने एक नया विज़न तैयार किया है जिसे ‘स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ कहा गया है। इसके तहत पेरिस समझौते के आर्टिकल 6.2 के नीचे एक खास समझौता (MOC) हुआ है, जिससे पर्यावरण को बचाने वाले प्रोजेक्ट्स में निवेश बढ़ेगा। साथ ही, जलवायु और पर्यावरण के क्षेत्र में सहयोग के लिए एक नया MOU भी लाया जाएगा जिससे दोनों देशों को अपने लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

किन खास चीजों पर रहेगा फोकस?

भारत और दक्षिण कोरिया ने कई अलग-अलग क्षेत्रों में मिलकर काम करने की योजना बनाई है। इसमें जमीन, हवा और पानी के सही इस्तेमाल से लेकर समुद्री जीवन को बचाने तक की बातें शामिल हैं। इन सबके विवरण नीचे दी गई टेबल में हैं।

क्षेत्र काम का विवरण
पर्यावरण जमीन, हवा, पानी और कचरा प्रबंधन का सही तरीका
ब्लू इकोनॉमी समुद्री विज्ञान और मछली पालन को बेहतर बनाना
समुद्र बचाव तटीय इलाकों की सुरक्षा और प्रदूषण रोकना
आर्कटिक रिसर्च आर्कटिक विज्ञान और शिपिंग में आपसी सहयोग
सौर ऊर्जा दक्षिण कोरिया का इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) में शामिल होना
ग्रीन ग्रोथ भारत का ग्लोबल ग्रीन ग्रोथ इंस्टीट्यूट (GGGI) में शामिल होना
डिप्लोमेसी दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के बीच नई बातचीत शुरू होना

पीएम मोदी ने साझेदारी के बारे में क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साझेदारी को बहुत बड़ा और व्यापक बताया। उन्होंने कहा कि अब सहयोग सिर्फ एक चीज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह ‘चिप्स से शिप’ और ‘टैलेंट से टेक्नोलॉजी’ तक फैलेगा। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि दुनिया में तनाव के इस माहौल में भारत और कोरिया मिलकर शांति और स्थिरता का संदेश दे रहे हैं।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.