भारत और श्रीलंका के बीच मछुआरों को लेकर चल रहा पुराना विवाद अब एक नया मोड़ ले सकता है। श्रीलंकाई सांसद Rauff Hakeem ने इस समस्या को सुलझाने के लिए कानूनी दांव-पेच के बजाय मानवीय नजरिया अपनाने की बात कही है। उन्होंने जोर दिया कि मछुआरों की रोजी-रोटी और उनके जीवन को प्राथमिकता देना सबसे ज्यादा जरूरी है।
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सांसद Hakeem ने तमिलनाडु के दौरे के दौरान Trichy International Airport पर पत्रकारों से बात करते हुए यह अपील की। उन्होंने कहा कि इस विवाद को खत्म करने के लिए Tamil Nadu government, भारत की केंद्र सरकार और श्रीलंका के अधिकारियों को एक साथ मिलकर काम करना चाहिए। उनके मुताबिक, यह मामला केवल कानून के उल्लंघन का नहीं है, बल्कि इसे बातचीत और आपसी समझौते से सुलझाया जाना चाहिए।
कानूनी नियम और पाबंदियां
श्रीलंका में मछली पकड़ने के नियमों को लेकर काफी सख्ती है। वहां के कानूनों के अनुसार कुछ बातें बहुत स्पष्ट हैं:
- Bottom trawling यानी तलहटी में जाल डालकर मछली पकड़ना श्रीलंका के कानून में पूरी तरह प्रतिबंधित है।
- देश में Fisheries and Aquatic Resources Act 1996 और Fisheries Regulation of Foreign Fishing Boats 1979 जैसे कानून लागू हैं।
- इन कानूनों में साल 2018 और 2023 में बदलाव किए गए, जिससे अब नियम तोड़ने वालों पर भारी जुर्माना, सख्त सजा और लंबी हिरासत का प्रावधान है।
Rauff Hakeem ने बताया कि श्रीलंका के मत्स्य मंत्री पहले ही तमिलनाडु का दौरा कर चुके हैं और वहां के राजनीतिक नेताओं के साथ-साथ भारत की केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों से भी चर्चा की है। यह विवाद मुख्य रूप से दक्षिण तमिलनाडु के मछुआरों और श्रीलंका के Jaffna Peninsula के मछली पकड़ने वाले समुदायों के बीच रहता है।
सांसद ने उम्मीद जताई कि तमिलनाडु में नई सरकार आने के बाद राज्य के विकास के साथ-साथ इस समस्या का भी स्थायी समाधान निकलेगा। उन्होंने साफ किया कि हालांकि बॉटम ट्रॉलिंग प्रतिबंधित है और यह विवाद की बड़ी वजह है, लेकिन सभी पक्षों को बातचीत जारी रखनी चाहिए ताकि मछुआरों को राहत मिल सके।