भारत और श्रीलंका ने समुद्री व्यापार और तकनीक के क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू किया है। 7 अप्रैल 2026 को कोलंबो डॉकयार्ड (CDPLC) और भारत के ड्रेजिंग कॉर्पोरेशन (DCIL) के बीच एक महत्वपूर्ण एमओयू पर साइन किए गए। इस समझौते के बाद अब दोनों देश मिलकर जहाजों की मरम्मत और उनके निर्माण पर जोर देंगे। भारतीय हाई कमिश्नर संतोष झा ने इस डील को दोनों देशों के लिए एक ‘विन-विन’ स्थिति बताया है, जिससे आपसी संबंध और मजबूत होंगे।

इस नए समझौते से क्या-क्या फायदे होंगे?

इस समझौते का मुख्य उद्देश्य जहाजों की मरम्मत और रखरखाव की सेवाओं को बेहतर बनाना है। अब भारतीय ड्रेजिंग बेड़े की मरम्मत और ड्राई-डॉकिंग का काम कोलंबो डॉकयार्ड में आसानी से हो सकेगा। इसके साथ ही दोनों कंपनियां मिलकर विशेष ड्रेजर और समुद्री जहाज बनाने के नए प्रोजेक्ट्स पर भी काम करेंगी। इस पार्टनरशिप की कुछ मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

  • तकनीकी सहयोग: दोनों देश एक-दूसरे के साथ आधुनिक तकनीक और जानकारी साझा करेंगे।
  • शिपबिल्डिंग: नए और आधुनिक समुद्री जहाजों के निर्माण में कोलंबो डॉकयार्ड की कुशलता का लाभ भारत को मिलेगा।
  • रणनीतिक साझेदारी: भारत की कंपनी Mazagon Dock Shipbuilders Limited (MDL) इस पार्टनरशिप को मुमकिन बनाने में अहम रही है और इसकी कोलंबो डॉकयार्ड में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

अधिकारियों और जानकारों ने क्या कहा?

DCIL के मैनेजिंग डायरेक्टर कैप्टन एस. दिवाकर ने कहा कि यह समझौता जहाजों को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। वहीं कोलंबो डॉकयार्ड के CEO थिमिर एस. गोडाकुम्बुरा ने इसे श्रीलंका के समुद्री उद्योग के लिए एक ऐतिहासिक पल बताया है। श्रीलंका के उप विदेश मंत्री अरुण हेमचंद्र ने भी इस मौके पर भारत की तारीफ करते हुए कहा कि भारत ने हमेशा संकट के समय श्रीलंका की मदद की है। राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने भी क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने में भारत की भूमिका को सराहा है।