खाड़ी देशों में ऊर्जा के ठिकानों पर हो रहे हमलों को लेकर भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि तेल और गैस से जुड़े बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना किसी भी हाल में सही नहीं है क्योंकि इससे दुनिया भर की ऊर्जा सप्लाई पर बुरा असर पड़ता है। 19 मार्च 2026 को जारी बयान में भारत ने इन हमलों को पूरी तरह से गलत बताया है और इसे वैश्विक स्थिरता के लिए बड़ा खतरा माना है।
भारत ने इन हमलों को लेकर क्या चिंता जताई है?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत इस समय सऊदी अरब, ईरान, अमेरिका और इजरायल जैसे प्रमुख देशों के साथ बातचीत कर रहा है। सरकार का मानना है कि नागरिक सुविधाओं और ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले करने से पूरे क्षेत्र में अस्थिरता पैदा होती है। भारत ने जोर दिया है कि समुद्री रास्तों से होने वाले व्यापार और ऊर्जा की सप्लाई में किसी भी तरह की रुकावट नहीं आनी चाहिए। भारत इस पूरे मामले में शांति और कूटनीति के रास्ते पर चलने की अपील कर रहा है।
खाड़ी में रह रहे भारतीयों और सुरक्षा पर क्या होगा असर?
- खाड़ी के देशों में लगभग 1 करोड़ भारतीय नागरिक रहते हैं, जिनकी सुरक्षा को लेकर भारत सरकार काफी सतर्क है।
- हाल ही में हुए संघर्ष के दौरान अब तक 5 भारतीय अपनी जान गंवा चुके हैं और एक नागरिक लापता बताया जा रहा है।
- सऊदी अरब के रियाद और यानबू रिफाइनरी जैसे इलाकों में हुए ड्रोन हमलों ने प्रवासियों के बीच चिंता बढ़ा दी है।
- मर्चेंट शिपिंग और व्यापारिक जहाजों पर हो रहे हमलों से भारत को होने वाली सप्लाई पर सीधा असर पड़ रहा है।
- भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की है।
