भारत में खाद बनाने के लिए सल्फुर एक बहुत जरूरी चीज है और इसके लिए हम काफी हद तक मिडिल ईस्ट के देशों पर निर्भर रहते हैं। लेकिन अब सल्फुर की कमी और बढ़ती कीमतों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। खबर है कि भारत अब सल्फुर के एक्सपोर्ट पर रोक लगाने की तैयारी कर रहा है ताकि देश के अंदर इसकी कमी न हो।

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भारत सल्फुर के लिए किन देशों से माल मंगवाता है?

भारत अपनी जरूरत का आधे से ज्यादा सल्फुर बाहर से मंगवाता है। इसमें सबसे ज्यादा हिस्सा गल्फ देशों का है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, ओमान, UAE, कतर, सऊदी अरब और कुवैत भारत के मुख्य सप्लायर हैं। साल 2024 और 2023 के आयात का ब्योरा नीचे दी गई टेबल में देखा जा सकता है।

सप्लायर देश 2024 आयात (मिलियन डॉलर) 2023 आयात (मिलियन डॉलर)
Qatar 67.2 44.73
UAE 65.8 82.68
Oman 48.8 42.35
Saudi Arabia 21.4 8.48
Kuwait 18.4 15.54
Russia 10.54

सल्फुर की किल्लत क्यों हो रही है और सरकार का क्या प्लान है?

अप्रैल 2026 की ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, मिडिल ईस्ट से होने वाले आयात में कमी आई है। इसका मुख्य कारण वहां चल रहा तनाव है, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के जरिए होने वाले शिपिंग रूट प्रभावित हुए हैं। इस वजह से भारत में सल्फुर की सप्लाई टाइट हो गई है और कीमतें बढ़ रही हैं।

इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने कुछ कड़े कदम उठाए हैं:

  • एक्सपोर्ट पर रोक: सरकार सल्फुर के निर्यात को रोकने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है ताकि घरेलू बाजार में इसकी उपलब्धता बनी रहे।
  • रिफाइनरियों को निर्देश: देश की तेल रिफाइनरियों को आदेश दिया गया है कि वे सल्फुर की सप्लाई पहले स्थानीय खाद कंपनियों को दें।
  • घरेलू मांग: भारत हर साल करीब 20 लाख मीट्रिक टन सल्फुर आयात करता है, जबकि करीब 8 लाख टन निर्यात करता है, जिसमें से 90% हिस्सा चीन जाता है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

भारत सल्फुर का इस्तेमाल मुख्य रूप से कहाँ करता है?

सल्फुर का इस्तेमाल मुख्य रूप से खाद (Fertilizer) उद्योग में किया जाता है, जिससे अमोनियम सल्फेट और सिंगल सुपर फॉस्फेट जैसे खाद बनाए जाते हैं।

मिडिल ईस्ट के देशों का भारत के सल्फुर आयात में कितना हिस्सा है?

भारत के कुल सल्फुर आयात का एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशियाई (West Asian) देशों से आता है, जो लगभग 65.8% से 84% तक रहता है।