भारत के सुप्रीम कोर्ट ने आपकी निजी जानकारी और प्राइवेसी को लेकर एक बहुत बड़ा फैसला सुनाया है। अब कोई भी कंपनी या सरकारी संस्था आपकी मर्जी के बिना आपके डेटा का गलत इस्तेमाल नहीं कर पाएगी। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि प्राइवेसी हर नागरिक का बुनियादी हक है और इसे सुरक्षित रखना अब अनिवार्य होगा।

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इस कानूनी बदलाव की नींव 24 अगस्त 2017 को पड़ी थी, जब K.S. Puttaswamy केस में सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेसी को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार माना था। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए भारत सरकार ने 11 अगस्त 2023 को ‘डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट’ (DPDP Act) को कानून बनाया।

डेटा सुरक्षा के लिए क्या नियम तय हुए

Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY) ने नवंबर 2025 में इस कानून और इसके नियमों को अधिसूचित किया था। इसके तहत डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड ऑफ इंडिया (DPBI) का गठन किया गया है ताकि कानून का पालन सही से हो सके।

कंपनियों और आम लोगों के लिए कुछ जरूरी तारीखें तय की गई हैं:

  • 14 नवंबर 2026: कंसेंट मैनेजर्स (Consent Managers) से जुड़ी व्यवस्थाएं शुरू हो जाएंगी।
  • 14 मई 2027: डेटा सुरक्षा, ब्रीच रिपोर्टिंग और व्यक्तिगत अधिकारों से जुड़े सभी मुख्य नियम पूरी तरह लागू हो जाएंगे, जिससे कंपनियों को कड़े नियमों का पालन करना होगा।

टेक कंपनियों को कोर्ट की सख्त चेतावनी

3 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने Meta और WhatsApp की प्राइवेसी पॉलिसी पर सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि टेक कंपनियां इस देश के नागरिकों की प्राइवेसी के साथ नहीं खेल सकतीं। अदालत ने कंपनियों को निर्देश दिया कि वे अपने सॉफ्टवेयर और ऐप्स बनाते समय ही प्राइवेसी को सबसे ऊपर रखें।

इसके अलावा, 15 मई 2026 को कोर्ट ने एक आदेश जारी कर कहा कि कंपनियां डेटा इकट्ठा करने के लिए ‘बंडल कंसेंट’ का इस्तेमाल नहीं करेंगी। अब कंपनियों को हर एक काम के लिए अलग-अलग और साफ तौर पर आपकी मंजूरी लेनी होगी।

AI और डेटा रिकवरी पर अपडेट

सुप्रीम कोर्ट की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कमेटी ने अदालतों में AI के इस्तेमाल के लिए नए नियमों का ड्राफ्ट तैयार किया है, जिसमें प्राइवेसी का पूरा ध्यान रखा गया है। वहीं, 19 जून 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट ने ‘राइट टू बी फॉरगॉटन’ (Right to be Forgotten) को मान्यता दी, जिससे लोग पुराने और नुकसानदेह रिकॉर्ड्स को हटवा सकेंगे।

कोर्ट ने MeitY से यह भी पूछा है कि विदेशी सर्वरों पर जमा भारतीयों के चोरी हुए डेटा को वापस लाने या उसे नष्ट करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।