भारत पिछले कई सालों से ताजिकिस्तान के Ayni एयरबेस का इस्तेमाल कर रहा था। अब इस बेस को खाली करने और अफगानिस्तान के Bagram एयरबेस को मिलने की चर्चाएं सोशल मीडिया पर काफी तेज़ हैं। इस पूरे मामले में क्या सच है और क्या सिर्फ अफवाहें, इसे विस्तार से समझना ज़रूरी है।
ताजिकिस्तान के Ayni एयरबेस से भारत क्यों हटा?
भारत ने ताजिकिस्तान के Ayni एयरबेस को आधुनिक बनाने के लिए लगभग 80 से 100 मिलियन डॉलर खर्च किए थे। यह बेस रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण था। लेकिन साल 2022 में इस बेस को इस्तेमाल करने का आपसी समझौता खत्म हो गया और उसे आगे नहीं बढ़ाया गया। भारत ने 2023 की शुरुआत तक अपना सारा सामान और कर्मचारी वहां से हटा लिए। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक रूस और चीन के दबाव की वजह से भी यह फैसला लिया गया।
क्या भारत को मिला Bagram एयरबेस?
सोशल मीडिया पर कई दावे किए जा रहे हैं कि तालिबान ने भारत को Bagram एयरबेस ऑफर किया है और भारत ने इसे स्वीकार कर लिया है। हालांकि, काबुल में तालिबान के अधिकारियों ने इन खबरों को पूरी तरह गलत बताया है। उन्होंने साफ किया कि भारत ने ऐसी कोई मांग नहीं की और न ही कोई ऑफर दिया गया। असल में भारत और तालिबान दोनों ही अमेरिका द्वारा इस बेस को वापस लेने की कोशिशों के खिलाफ थे।
पाकिस्तान की FATF लिस्ट और बांध का क्या मामला है?
पाकिस्तान को अक्टूबर 2022 में ही FATF की ग्रे लिस्ट से बाहर कर दिया गया था, जिसका एयरबेस के मामले से कोई लेना-देना नहीं है। वहीं अफगानिस्तान में कुनार नदी पर बांध बनाने की योजना है, जिसे भारत का समर्थन प्राप्त है। भारत ने हमेशा अफगानिस्तान की जल प्रबंधन परियोजनाओं में मदद की है। यह भारत का अफगानिस्तान के प्रति सहयोग है, लेकिन इसका Bagram एयरबेस मिलने के साथ कोई सीधा सौदा नहीं हुआ है।
