भारत सरकार ने 16 जून से 22 जून 2026 तक Telegram मैसेंजर पर अस्थायी रोक लगा दी है। यह फैसला NEET-UG 2026 की परीक्षा में होने वाली धोखाधड़ी और पेपर लीक को रोकने के लिए लिया गया। इस बैन की वजह से अब लोग अपने फोन में VPN ऐप्स डाउनलोड कर रहे हैं ताकि वे इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल जारी रख सकें।

क्यों लगाया गया बैन

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की सलाह पर आईटी एक्ट की धारा 69A के तहत यह कदम उठाया। सरकार का कहना है कि कुछ गिरोह Telegram के मैसेज एडिट करने वाले फीचर का गलत इस्तेमाल कर रहे थे, जिससे परीक्षा के बाद सबूत बदले जा रहे थे। इसी वजह से सरकार ने इस फीचर को 30 जून 2026 तक बंद रखने का आदेश दिया है।

19 जून 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकार के इस फैसले को सही ठहराया। जस्टिस तेजस कारिया ने अपने फैसले में कहा कि परीक्षा को निष्पक्ष रखने के लिए यह जरूरी कदम था। वहीं, गूगल और एप्पल ने सरकार के आदेश का पालन करते हुए अपने ऐप स्टोर से Telegram को हटा दिया था।

VPN और अन्य ऐप्स की मांग बढ़ी

Telegram पर बैन लगते ही लोग इसे चलाने के लिए VPN टूल्स का सहारा ले रहे हैं। Appfigures के डेटा के मुताबिक, बैन की घोषणा के दिन प्रमुख VPN ऐप्स की डाउनलोडिंग में 49% की बढ़ोतरी देखी गई। लोग अब प्राइवेसी और बिना रुकावट बातचीत के लिए इन ऐप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।

ऐप का नाम डाउनलोड में बढ़ोतरी / अपडेट
Proton VPN एप्पल स्टोर पर 113% और गूगल प्ले पर 64% बढ़त
Turbo VPN एप्पल स्टोर पर 85% और गूगल प्ले पर 35% बढ़त
Signal गूगल प्ले स्टोर पर 322% की भारी बढ़त
iMe ऐप डाउनलोड्स 827 से बढ़कर 50,000 के पार पहुंचे

Telegram की प्रतिक्रिया

Telegram के फाउंडर पावेल ड्यूरोव ने इस फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस बैन से भारत के करीब 15 करोड़ आम यूजर्स को सजा मिल रही है। ड्यूरोव का मानना है कि पेपर लीक करने वाले लोग सिर्फ प्लेटफॉर्म बदल लेंगे, लेकिन बैन लगाने से समस्या खत्म नहीं होगी। Telegram ने इस मामले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती भी दी थी, लेकिन कोर्ट ने सरकार के फैसले को बरकरार रखा।