भारत और UAE अब रक्षा के क्षेत्र में हाथ मिला रहे हैं। दोनों देशों के बीच भारत की सबसे ताकतवर ब्रह्मोस मिसाइल और अकाशिथियर एयर डिफेंस सिस्टम की डील को लेकर बातचीत चल रही है। यह बातचीत अभी शुरुआती दौर में है लेकिन काफी तेजी से आगे बढ़ रही है।
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नई दिल्ली में हुई बड़ी मीटिंग
24 जून 2026 को नई दिल्ली में एक खास मीटिंग हुई। इसमें भारत की तरफ से जॉइंट सेक्रेटरी अमिताभ प्रसाद और UAE की तरफ से स्टाफ ब्रिगेडियर जमाल इब्राहिम मोहम्मद इब्राहिम अलमार-ज़ूकी शामिल थे। इस बैठक में डिफेंस इंडस्ट्री में सहयोग बढ़ाने, नई टेक्नोलॉजी और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने पर चर्चा की गई। इसी दौरान ब्रह्मोस और अकाशिथियर सिस्टम को UAE को बेचने की बात सामने आई।
UAE को क्यों चाहिए ये सिस्टम
UAE अपनी हवाई और मिसाइल सुरक्षा को और बेहतर बनाना चाहता है। हाल ही में पश्चिम एशिया में हुए हमलों के बाद UAE ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा करने का फैसला किया है। वह खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे अहम रास्तों की सुरक्षा करना चाहता है।
भारत के लिए बड़ा फायदा
अगर यह डील पूरी होती है, तो यह भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट प्रोग्राम के लिए एक बड़ी जीत होगी। भारत का रक्षा निर्यात मार्च 2026 को खत्म हुए साल में 4 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया है, जो कि 2013-14 में सिर्फ 7.26 मिलियन डॉलर था।
रूस की मंजूरी और रणनीतिक असर
ब्रह्मोस मिसाइल भारत और रूस ने मिलकर बनाई है, इसलिए इसे बेचने के लिए रूस की मंजूरी जरूरी है। जानकारों का मानना है कि रूस और अबू धाबी के अच्छे रिश्तों की वजह से इसमें कोई दिक्कत नहीं आएगी। साथ ही, यह कदम सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुए रक्षा समझौते के जवाब में देखा जा रहा है।
बता दें कि भारत ने इससे पहले 2022 में फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल बेची थी। इसके अलावा वियतनाम और इंडोनेशिया के साथ भी डील हुई है और थाईलैंड, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और चिली जैसे देश भी इसमें दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
