प्रधानमंत्री Narendra Modi की अबू धाबी यात्रा के दौरान भारत और UAE ने तेल और LPG की सप्लाई के लिए बड़े समझौतों पर साइन किए हैं। यह फैसला तब लिया गया है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है। इससे भारत में ईंधन की कमी नहीं होगी और ऊर्जा सुरक्षा बनी रहेगी।
भारत और UAE के बीच तेल और LPG पर क्या हुआ समझौता?
भारत और UAE ने शुक्रवार, 15 मई 2026 को LPG सप्लाई और रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (Strategic Petroleum Reserves) के लिए MoU साइन किए। यह समझौता Indian Oil Corporation और Abu Dhabi National Oil Company (ADNOC) के बीच हुआ है। भारत दुनिया में LPG का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है और UAE इसका सबसे बड़ा सप्लायर है।
| विवरण | डेटा/जानकारी |
|---|---|
| LPG सप्लाई | UAE भारत की 40% ज़रूरतें पूरी करता है |
| कच्चा तेल (Crude Oil) | भारत के कुल आयात का लगभग 11% |
| निवेश (Investment) | US$ 5 बिलियन |
| ईंधन दाम अपडेट | ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी |
इस डील से भारत और आम जनता को क्या फायदा होगा?
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे विवाद की वजह से तेल की सप्लाई रुकने का खतरा रहता है। इस समझौते के बाद भारत को लंबी अवधि तक ईंधन मिलता रहेगा, जिससे बाज़ार में तेल की किल्लत नहीं होगी। प्रधानमंत्री Modi ने कहा कि Strait of Hormuz को खुला रखना ज़रूरी है ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार न रुके। यह डील भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करेगी और ग्लोबल मार्केट के उतार-चढ़ाव से बचाएगी।
ऊर्जा के अलावा और कौन से बड़े समझौते हुए?
प्रधानमंत्री की इस यात्रा में सिर्फ तेल की बात नहीं हुई। भारत और UAE ने रणनीतिक रक्षा साझेदारी (Strategic Defence Partnership) और गुजरात के Vadinar में शिप रिपेयर क्लस्टर बनाने पर भी सहमति जताई। साथ ही UAE ने भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर, RBL बैंक और Samman Capital में 5 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
भारत और UAE के बीच LPG समझौते का क्या मतलब है?
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG आयातक है और UAE इसकी सबसे बड़ी सप्लाई करता है। इस नए समझौते से भारत को लंबी अवधि तक गैस की स्थिर सप्लाई मिलेगी और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserves) क्या है?
यह तेल का वह स्टॉक होता है जिसे आपातकाल या युद्ध जैसी स्थिति में इस्तेमाल किया जाता है। ISPRL और ADNOC मिलकर भारत के मंगलुरु प्लांट जैसे केंद्रों पर इसे मैनेज करेंगे ताकि संकट के समय तेल की कमी न हो।
