भारत और ब्रिटेन के बीच रक्षा संबंधों को मजबूत करने के लिए एक बड़ी शुरुआत हुई है। भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने यूके का आधिकारिक दौरा किया। इस यात्रा का मुख्य मकसद दोनों देशों के बीच मिल-जुलकर नई तकनीक और हथियारों को विकसित करना था ताकि सुरक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाया जा सके।

भारत और ब्रिटेन के बीच किन बातों पर हुई चर्चा?

जनरल अनिल चौहान ने यूके के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ एयर चीफ मार्शल सर रिचर्ड नाइटन और रक्षा मंत्रियों से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों ने साइबर खतरों और व्यापार में आने वाली दिक्कतों जैसी वैश्विक समस्याओं से निपटने का वादा किया। खास तौर पर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और समृद्धि बनाए रखने पर जोर दिया गया। इसके अलावा ट्रेनिंग और सैन्य ऑपरेशंस में आपसी सहयोग बढ़ाने पर भी बात हुई।

हथियारों और तकनीक के लिए क्या है नया प्लान?

दोनों देशों ने अब ‘को-डिजाइन, को-डेवलपमेंट और को-प्रोडक्शन’ के फॉर्मूले पर काम करने का फैसला किया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब महत्वपूर्ण डिफेंस टेक्नोलॉजी को साथ मिलकर डिजाइन और तैयार किया जाएगा। जनरल चौहान ने ब्रिटिश डिफेंस इंडस्ट्री के लीडर्स से भी बातचीत की ताकि सप्लाई चेन और तकनीक के ट्रांसफर को आसान बनाया जा सके। साइबर, इंटेलिजेंस और स्पेस जैसे क्षेत्रों में जानकारी साझा करने और मजबूती लाने पर भी सहमति बनी।

इस दौरे के अलावा और क्या महत्वपूर्ण रहा?

जनरल चौहान ने रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज का दौरा किया और भारतीय सेना के आधुनिक बदलावों पर एक चर्चा का नेतृत्व किया। ब्रिटेन ने भारत के साथ सहयोग के लिए ‘डिफेंस पार्टनरशिप-इंडिया (DP-I)’ नाम का एक खास ऑफिस भी बनाया है। यह पूरी योजना ‘विजन 2035’ एग्रीमेंट के तहत काम कर रही है, जिसका लक्ष्य आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय स्थिरता और सुरक्षा को बढ़ाना है।

Sushma Kumari

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