Strait of Hormuz में चल रही हलचल ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक खास मीटिंग में भारत ने साफ कहा कि कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाना और रास्ता रोकना बिल्कुल गलत है। यह मामला सीधे तौर पर भारत के व्यापार और तेल की सप्लाई से जुड़ा है, जिससे आम लोगों और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है।
UN की मीटिंग में भारत ने क्या कड़ा संदेश दिया?
17 मई 2026 को UNECOSOC की मीटिंग में भारत के स्थायी प्रतिनिधि Parvathaneni Harish ने हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि समुद्र में सुरक्षा और जहाजों के आने-जाने की आज़ादी बहुत ज़रूरी है। भारत ने मांग की कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पूरी तरह पालन हो। उन्होंने बताया कि इस संकट से निपटने के लिए दुनिया के देशों को मिलकर तुरंत और बुनियादी कदम उठाने होंगे ताकि सप्लाई चेन बनी रहे।
भारतीय जहाजों पर हमले और मौजूदा हालात क्या हैं?
समुद्री रास्ते पर तनाव की वजह से भारतीय जहाजों और वहां काम करने वाले नाविकों की जान जोखिम में है। हाल के दिनों में कई गंभीर घटनाएं सामने आई हैं:
- ओमान तट पर हमला: 14 मई 2026 को एक भारतीय कार्गो जहाज ओमान के तट के पास डूब गया। शक है कि उस पर ड्रोन हमला हुआ था। इस हादसे में सभी 14 भारतीय चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया।
- जहाजों की स्थिति: भारत के विदेश मंत्रालय ने बताया कि डिप्लोमैटिक कोशिशों से 11 भारतीय जहाज Strait of Hormuz से बाहर निकल पाए हैं, लेकिन 13 जहाज अभी भी फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं और निकलने का इंतजार कर रहे हैं।
- ईरान और अन्य देशों का रुख: ईरान के राजदूत Amir Saeid Iravani ने इस संकट के लिए अमेरिका और इजराइल को जिम्मेदार ठहराया। वहीं ब्रिटेन ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई और रास्ता खोलने के लिए डिप्लोमैटिक कोशिशें करने की बात कही।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Strait of Hormuz में भारतीय जहाजों के साथ क्या हुआ?
14 मई 2026 को ओमान के पास एक भारतीय जहाज ड्रोन हमले के कारण डूब गया, हालांकि सभी 14 चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं। फिलहाल 11 जहाज बाहर निकल चुके हैं और 13 अभी भी फंसे हुए हैं।
भारत ने UN में अपनी क्या मांग रखी है?
भारत ने मांग की है कि कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाना बंद किया जाए और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करते हुए समुद्र में जहाजों की आवाजाही की आज़ादी को बहाल किया जाए।
