भारत ने UN में उठाया कड़ा कदम, कहा- आतंकवादियों को राजनीतिक फायदे के लिए नहीं किया जाए इस्तेमाल.

Aanya20 August 20262 min read70 viewsIndia
भारत ने UN में उठाया कड़ा कदम, कहा- आतंकवादियों को राजनीतिक फायदे के लिए नहीं किया जाए इस्तेमाल.

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में आतंकवादियों की सूची बनाने और हटाने की प्रक्रिया को लेकर बड़ी बात कही है। भारत ने साफ तौर पर कहा है कि इस वैश्विक मंच का इस्तेमाल राजनीतिक फायदों के लिए आतंकवादियों को बचाने या उन्हें वैध साबित करने के लिए नहीं होना चाहिए। भारत की तरफ से यह सख्त बयान संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी misión की चार्ज डी' अफेयर्स योजना पटेल ने दिया। यह बात उन्होंने 19 अगस्त 2026 को सुरक्षा परिषद की कार्यप्रणाली पर हुई एक खुली बहस के दौरान कही थी। इस बारे में अधिक जानकारी आप DD News रिपोर्ट में देख सकते हैं।

आतंकवाद से जुड़े मामलों में पारदर्शिता की मांग

योजना पटेल ने बैठक के दौरान बताया कि कुछ देश अपने छोटे राजनीतिक फायदों के लिए आतंकवादियों और आतंकी संगठनों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रतिबंध लगाने या हटाने का फैसला ठोस सबूतों और पारदर्शिता के आधार पर होना चाहिए, ना कि राजनीतिक दबाव में। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह देखा गया है कि कुछ देशों ने अपने साथियों को बचाने के लिए नियमों का गलत इस्तेमाल किया है, जिस पर भारत ने गहरी आपत्ति जताई है। इस बारे में आप NewsOnAir रिपोर्ट में पढ़ सकते हैं कि कैसे भारत ने वैश्विक वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में तुरंत सुधार करने की मांग की है।

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कमेटी के खाली पदों पर जताई चिंता

भारत ने सुरक्षा परिषद की काउंटर-आतंकवाद समितियों के नेतृत्व में चल रहे गतिरोध पर भी खुलकर बात की। ये समितियां पिछले आठ महीनों से बिना अध्यक्ष के खाली पड़ी हैं क्योंकि अंदरूनी असहमति के कारण कोई फैसला नहीं हो पा रहा है। भारत ने मांग की है कि इन खाली पदों को भरने के लिए एक तय समयसीमा तय की जानी चाहिए क्योंकि ऐसी स्थिति से दुनिया भर में आतंकवाद के खिलाफ चल रही लड़ाइयों को नुकसान पहुंचता है। इस संबंध में आधिकारिक जानकारी भारत के स्थायी मिशन की PMI New York वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई है।

सुरक्षा परिषद में बड़े बदलावों की जरूरत

भारत ने सिर्फ तात्कालिक मुद्दों पर ही नहीं, बल्कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के ढांचे में बड़े बदलाव की भी जोरदार मांग की है। भारत का कहना है कि सुरक्षा परिषद का मौजूदा स्वरूप साल 1945 की दुनिया को दिखाता है, जबकि आज की वैश्विक स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। भारत ने मांग की है कि परिषद में स्थायी और अस्थायी दोनों तरह की सीटों को बढ़ाया जाना चाहिए ताकि ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों को सही प्रतिनिधित्व मिल सके। इसके अलावा, जिन देशों के सैनिक और पुलिसकर्मी संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में अपनी सेवाएं देते हैं, उन्हें भी उन नीतियों के फैसलों में बड़ी हिस्सेदारी मिलनी चाहिए जो उनके कामकाज को तय करती हैं।

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