भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अमेरिका के साथ नए सिरे से रणनीति बना रहा है। केंद्रीय मंत्री Hardeep Singh Puri और अमेरिकी राजदूत Sergio Gor ने इस दिशा में अहम बातचीत की। इसका मुख्य उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाना और दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को और मजबूत करना है।
भारत की तेल और गैस सप्लाई की मौजूदा स्थिति क्या है?
भारत ने अपनी ऊर्जा सप्लाई को सुरक्षित करने के लिए कई बड़े बदलाव किए हैं। मंत्री Hardeep Singh Puri ने बताया कि देश में पेट्रोल, डीजल, केरोसिन और एलपीजी की कोई कमी नहीं है। भारत अब दुनिया के 40 अलग-अलग देशों से कच्चा तेल मंगा रहा है ताकि किसी एक देश या रास्ते पर निर्भरता न रहे।
| विवरण | पुरानी स्थिति | नई स्थिति |
|---|---|---|
| कच्चा तेल स्रोत (देश) | 27 देश (2006-07) | 40 देश |
| Non-Hormuz तेल सप्लाई | 55% | लगभग 70% |
| LPG के नए स्रोत | मुख्यतः खाड़ी देश | अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा, रूस, अल्जीरिया |
अमेरिका के साथ किन मुख्य मुद्दों पर चर्चा हुई?
मंत्री Hardeep Singh Puri और राजदूत Sergio Gor ने ऊर्जा साझेदारी को आगे बढ़ाने पर बात की। अमेरिका से भरोसेमंद ऊर्जा मंगाकर भारत अपनी आर्थिक मजबूती बढ़ाना चाहता है। वहीं, प्रधानमंत्री Narendra Modi ने राष्ट्रपति Donald Trump से फोन पर बात कर Strait of Hormuz को खुला और सुरक्षित रखने को कहा ताकि वैश्विक तनाव के बीच तेल की सप्लाई में कोई रुकावट न आए।
भविष्य में किन बड़े समझौतों की उम्मीद है?
आने वाले समय में भारत और अमेरिका के बीच बड़े ‘big-ticket’ ऊर्जा सौदे हो सकते हैं। इसमें परमाणु ऊर्जा और Small Modular Reactors (SMRs) पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा, विदेश सचिव Vikram Misri और अमेरिकी ऊर्जा सचिव Chris Wright ने कोल गैसीफिकेशन और अमेरिकी LPG निर्यात को बढ़ाने पर भी चर्चा की है। भारत ने हाल ही में कतर के साथ भी अपनी ऊर्जा साझेदारी को मजबूत किया है।
