Indian Banks Update: एशिया में बढ़ता दबाव, फिर भी भारतीय बैंक रहेंगे मजबूत, Fitch की रिपोर्ट में खुलासा
दुनिया भर में चल रही अनिश्चितताओं के बीच दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के बैंकों पर दबाव बढ़ रहा है. लेकिन ऐसी स्थिति में भी भारतीय बैंक काफी मजबूत नजर आ रहे हैं. Fitch Ratings की नई रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि भारतीय बैंकों को कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है, फिर भी वे अपने पड़ोसी देशों के बैंकों के मुकाबले बेहतर स्थिति में हैं.
भारतीय बैंकों के सामने क्या हैं मुख्य चुनौतियां?
भारतीय बैंकों को इस समय मार्जिन में कमी और लिक्विडिटी यानी नकदी की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, 29 मार्च 2026 तक बैंकिंग सिस्टम का लिक्विडिटी सरप्लस घटकर जमा राशि का करीब 0.5% रह गया था. वैश्विक जोखिमों की वजह से FY27 तक सेक्टर मार्जिन में 20-30 बेसिस पॉइंट और ऑपरेटिंग प्रॉफिट में 30-40 बेसिस पॉइंट की गिरावट आ सकती है.
बैंकों की मजबूती का असली कारण क्या है?
भारतीय बैंक अपने मजबूत बुनियादी ढांचे और घरेलू फंडिंग की वजह से सुरक्षित हैं. RBI द्वारा किए गए नियमों में बदलाव और कड़ी निगरानी ने जोखिमों को कम किया है. 2014 में शुरू हुआ CRILC सिस्टम भी बड़े कॉर्पोरेट लोन से जुड़े खतरों को रोकने में काफी मददगार रहा है. Fitch का कहना है कि भारतीय बैंकों के पास पर्याप्त बफर है, जिससे वे किसी भी दबाव को आसानी से झेल लेंगे.
आने वाले समय में क्या बदलाव होंगे?
RBI अब एक नया फॉरवर्ड-लुकिंग एक्सपेक्टेड क्रेडिट लॉस (ECL) फ्रेमवर्क लागू करने की तैयारी में है, जिसे 1 अप्रैल 2027 से लागू किया जाएगा. इसके साथ ही, RBI की बढ़ती निगरानी और मजबूत सुपरवाइजरी टूलकिट से बैंकिंग माहौल और बेहतर होगा. रिपोर्ट के मुताबिक, रुपया स्थिरता बनाए रखने के प्रयासों से नकदी थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन इसका सीधा असर बैंकों की साख पर नहीं पड़ेगा.




