कुवैत में रहने वाले भारतीय समुदाय ने एक बार फिर अपनी एकजुटता और प्यार दिखाया है। बंगाली कल्चरल सोसाइटी (BCS) ने फिंटास में एक खास ‘अल अरफज’ फूल बनाने की वर्कशॉप रखी। इस कार्यक्रम के जरिए भारतीयों ने कुवैत देश और उसकी सेना के प्रति अपना सम्मान और आभार व्यक्त किया।
कुवैत और भारतीय समुदाय के बीच क्या है खास रिश्ता?
बंगाली कल्चरल सोसाइटी (BCS) के अध्यक्ष Alokesh Roy ने बताया कि कुवैत और भारतीय समुदाय का रिश्ता बहुत पुराना है। उन्होंने कहा कि कई पीढ़ियों से भारतीय लोग कुवैत में रह रहे हैं और यहाँ के विकास में अपना योगदान दे रहे हैं। यह वर्कशॉप उसी कृतज्ञता और एकजुटता को दिखाने का एक छोटा सा तरीका था।
अल अरफज फूल का महत्व और कार्यक्रम की खास बातें
- फूल का प्रतीक: सांस्कृतिक पत्रकार Chaitali B Roy ने बताया कि अल अरफज फूल कठिन रेगिस्तानी परिस्थितियों में भी खिलता है, जो कुवैत की मजबूती और लचीलेपन का प्रतीक है।
- खास मेहमान: OilServ की CEO और “कुवैत की आयरन लेडी” कही जाने वाली Sara Akbar ने इस कार्यक्रम में शिरकत की। उन्होंने कुवैत के अलग-अलग क्षेत्रों में भारतीयों के काम की तारीफ की।
- आयोजन की तारीख: यह पूरा कार्यक्रम 28 अप्रैल 2026 को आयोजित किया गया था।
बंगाली कल्चरल सोसाइटी (BCS) के बारे में जानकारी
BCS एक प्रमुख भारतीय सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन है जिसकी स्थापना 1978 में हुई थी। इसका मुख्य मकसद बंगाली भाषा, साहित्य, संगीत और परंपराओं को बचाए रखना और उन्हें बढ़ावा देना है। यह संस्था समय-समय पर कई चैरिटी और सामाजिक कार्यों में भी हिस्सा लेती है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
यह वर्कशॉप कब और कहाँ आयोजित की गई थी?
यह अल अरफज फूल बनाने की वर्कशॉप 28 अप्रैल 2026 को कुवैत के फिंटास इलाके में आयोजित की गई थी।
बंगाली कल्चरल सोसाइटी (BCS) क्या है?
यह 1978 में बनी एक भारतीय संस्था है जो बंगाली संस्कृति और परंपराओं को बढ़ावा देने के साथ-साथ समाज सेवा के काम करती है।