भारत सरकार ने Sanmar Herald जहाज़ पर ‘साइबर फ्रॉड’ के दावों को किया खारिज, Persian Gulf में सुरक्षित हैं भारतीय नाविक

भारत सरकार ने Persian Gulf में भारतीय जहाज़ Sanmar Herald के साथ हुए कथित साइबर फ्रॉड की खबरों को पूरी तरह गलत बताया है। शिपिंग मंत्रालय ने साफ़ किया है कि जहाज़ के कप्तान ने रास्ता पाने के लिए किसी को पैसे नहीं दिए। सरकार ने पुष्टि की है कि खाड़ी क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और उनकी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है।

क्या था Sanmar Herald जहाज़ के साइबर फ्रॉड का मामला?

शिपिंग मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी मुकेश मंगल ने एक ब्रीफिंग के दौरान बताया कि सोशल मीडिया पर ऐसी खबरें फैल रही थीं कि जहाज़ के कप्तान ने IRGC नेवी के नाम पर कुछ लोगों को अमेरिकी डॉलर दिए। दावा किया गया था कि यह पैसा सुरक्षित रास्ता पाने के लिए दिया गया और कप्तान साइबर अपराधियों का शिकार हो गए। मुकेश मंगल ने इस खबर को पूरी तरह फर्जी बताया और कहा कि जहाज़ के मालिक से बात करने के बाद यह साफ़ हो गया कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई है।

भारतीय नाविकों की सुरक्षा और सरकार की मदद

मंत्रालय ने बताया कि पिछले 24 घंटों में किसी भी भारतीय जहाज़ के साथ कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है। DG Shipping का कंट्रोल रूम लगातार काम कर रहा है, जिसने अब तक 6,700 से ज़्यादा कॉल और 13,900 ईमेल का जवाब दिया है। सरकार विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावासों के साथ तालमेल बिठा रही है ताकि नाविकों की मदद हो सके। अब तक 2,400 से ज़्यादा भारतीय नाविकों को सुरक्षित भारत वापस लाया जा चुका है, जिसमें 17 अप्रैल से पहले के आंकड़े शामिल हैं।

ईरानी सेना और अन्य जहाज़ों से जुड़ी रिपोर्ट्स

एक तरफ सरकार ने धोखाधड़ी के दावों को खारिज किया है, वहीं कुछ अन्य रिपोर्ट्स में अलग बातें कही गई हैं। बताया गया कि Sanmar Herald और Jag Arnav नाम के जहाज़ों पर ईरानी सेना ने फायरिंग की थी। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, फायरिंग से पहले Sanmar Herald के साथ क्रिप्टोकरेंसी स्कैम की कोशिश भी की गई थी, जिसमें Tether (USDT) की मांग की गई थी। हालांकि, भारत सरकार ने केवल साइबर फ्रॉड और पैसे देने वाले दावों को गलत बताया है।