वेस्ट एशिया संकट की वजह से भारत के व्यापार और शिपिंग में काफी दिक्कतें आ रही हैं। पैकेजिंग के सामान और कच्चे माल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे कई सेक्टर परेशान हैं। इसी समस्या को सुलझाने के लिए कॉमर्स मिनिस्ट्री और पोर्ट्स डिपार्टमेंट ने 9 और 10 अप्रैल 2026 को बड़ी बैठकें कीं। सरकार अब कोशिश कर रही है कि व्यापारियों के खर्च को कम किया जा सके और सप्लाई चेन को फिर से पटरी पर लाया जाए।

किन चीजों के दाम बढ़े और किन सेक्टर पर पड़ा असर?

वेस्ट एशिया में जारी तनाव के कारण पॉलिमर और रेजिन जैसे पेट्रोकेमिकल सामानों की किल्लत हो गई है। इसकी वजह से पैकेजिंग मटेरियल की कीमतों में पिछले कुछ हफ्तों में 50% तक का उछाल देखा गया है। इस महंगाई का सबसे ज्यादा असर कपड़ा (Apparel), चमड़ा (Leather), टेलीकॉम और मेडिकल डिवाइस बनाने वाली कंपनियों पर पड़ा है। छोटे व्यापारियों यानी MSMEs के लिए यह स्थिति और भी मुश्किल हो गई है क्योंकि उनकी लागत बढ़ गई है।

सरकार ने समस्याओं को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए?

  • निर्यात और आयात के रुझानों पर नजर रखने के लिए अब हर हफ्ते मॉनिटरिंग की जाएगी।
  • पोर्ट्स और टर्मिनल ऑपरेटर्स को निर्देश दिए गए हैं कि वे कामकाज में पारदर्शिता लाएं और फंसे हुए कंटेनरों को जल्दी खाली करें।
  • कॉमर्स सेक्रेटरी Rajesh Agrawal ने पैकेजिंग सामानों की घरेलू क्षमता को जांचने और आयात पर निर्भरता कम करने के निर्देश दिए हैं।
  • CBIC खतरनाक कार्गो (hazardous cargo) को उतारने की प्रक्रिया को आसान बनाने पर विचार कर रहा है।

व्यापारियों ने सरकार से क्या मांगें की हैं?

प्रमुख मांग विवरण
RELIEF स्कीम इस स्कीम का दायरा बढ़ाकर मिस्र (Egypt) जैसे देशों को भी शामिल करने की मांग की गई है।
कंटेनर नियम विदेशी पोर्ट्स पर उतरे कंटेनरों को वापस भारत लाने की प्रक्रिया सरल करने को कहा गया है।
कच्चा माल LNG, हीलियम और पेट्रोकेमिकल डेरिवेटिव्स की लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग है।
GST रिफंड व्यापारियों की नकदी बढ़ाने के लिए GST रिफंड जल्दी देने की बात कही गई है।
पोर्ट छूट पोर्ट्स द्वारा दी जाने वाली छूट और रियायतों की जानकारी पारदर्शी तरीके से देने को कहा गया है।
Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.