अमेरिका में काम करने वाले भारतीय निवेशकों को ट्रंप सरकार ने बड़ा झटका दे डाला है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को H1B वीज़ा की सालाना फीस बढ़ाकर $100,000 कर दी। अमेरिकी सरकार का कहना है कि यह बढ़ोतरी सिर्फ “सच्चे उच्च-प्रशिक्षित” कर्मचारियों को ही अमेरिका आने देगी और अमेरिकी नौकरियों की सुरक्षा करेगी।

अमेरिकी सरकार की इस घोषणा पर भारतीय पेशेवरों और उद्योग नेताओं ने अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी। पूर्व IAS अधिकारी और NITI Aayog के पूर्व CEO अमिताभ कांत ने सोशल मीडिया साइट X पर लिखा कि यह कदम अमेरिका में नवाचार को रोक देगा और भारत में बढ़ावा देगा। उनका कहना है कि अमेरिका के इस कदम से भारतीय डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक और इनोवेटर भारत की प्रगति में योगदान दे सकेंगे।

उनकी ये पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। इस पोस्ट को अब तक लाखों लोग देख चुके हैं। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने सुझाव दिया कि भारत को अपने डेटा और ऐप्स पर नियंत्रण रखना चाहिए और अपनी नौकरियों के लिए अपनी प्रतिभा को बढ़ावा देना चाहिए। वहीं कुछ ने कहा कि यह कदम अमेरिका के लिए नुकसानदायक है, लेकिन वैश्विक नवाचार तब बढ़ता है जब प्रतिभा स्वतंत्र रूप से बहती है।

व्हाइट हाउस के स्टाफ सचिव विल शार्फ ने इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि H1B वीज़ा प्रणाली का दुरुपयोग होता है और यह सिर्फ उन क्षेत्रों में काम करने वाले उच्च-प्रशिक्षित लोगों को अमेरिका आने देने के लिए है, जहां अमेरिकी काम नहीं कर रहे।