भारतीय आईटी कंपनियों के लिए आने वाला समय थोड़ा चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। Crisil Ratings की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा वित्त वर्ष FY27 और अगले वित्त वर्ष FY28 में भारतीय आईटी सेक्टर की रेवेन्यू ग्रोथ 1 से 3 प्रतिशत के बीच ही रहने का अनुमान है। इस सुस्ती के पीछे मुख्य कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का बढ़ता प्रभाव और विदेशी ग्राहकों द्वारा खर्च में की जा रही कटौती है।

AI से बदल रहा काम करने का तरीका

Crisil Ratings के सीनियर डायरेक्टर Anuj Sethi के मुताबिक, AI अब सिर्फ काम आसान करने का जरिया नहीं रहा, बल्कि यह कंपनियों के पुराने बिजनेस मॉडल को भी चुनौती दे रहा है। ग्राहक अब ऐसे AI-native समाधान मांग रहे हैं जिनमें कम घंटों की जरूरत पड़ती है। इसी वजह से कंपनियों के बिलिंग घंटों पर दबाव बढ़ रहा है और नए प्रोजेक्ट्स मिलने में देरी हो रही है।

नौकरियों पर क्या असर पड़ेगा

कंपनियां अब अपना मुनाफा बचाने के लिए ऑटोमेशन पर ज्यादा जोर दे रही हैं और केवल उन लोगों को काम पर रख रही हैं जिन्हें AI जैसे नए स्किल्स की जानकारी है। नतीजतन, आईटी सेक्टर में नई भर्तियों यानी net headcount additions की रफ्तार दोनों वित्त वर्षों में काफी धीमी रहने की उम्मीद है। हालांकि, कंपनियां अपने संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने पर ध्यान दे रही हैं।

मुनाफे और आगे की स्थिति

फिलहाल आईटी कंपनियों का ऑपरेटिंग मार्जिन 22 से 23 प्रतिशत के आसपास बना हुआ है, जिसका श्रेय बेहतर मैनेजमेंट और रुपये की कीमत में आई 5 से 7 प्रतिशत की गिरावट को जाता है। Crisil Ratings के डायरेक्टर Aditya Jhaver ने चेतावनी दी है कि FY28 से यह मार्जिन कम हो सकता है क्योंकि सैलरी का खर्च बढ़ रहा है और AI में भारी निवेश करना पड़ रहा है। अच्छी बात यह है कि भारतीय आईटी कंपनियों की आर्थिक स्थिति मजबूत है और उन पर कर्ज कम है, जिससे वे भविष्य की डिजिटल जरूरतों के लिए निवेश करने में सक्षम हैं।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.