Indian Stock Market: वेस्ट एशिया तनाव और क्रूड ऑयल के दाम बढ़ने से भारतीय शेयर बाजार धड़ाम, सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट.

Praggya Singh sabal11 August 20263 min read54 viewsIndia
Indian Stock Market: वेस्ट एशिया तनाव और क्रूड ऑयल के दाम बढ़ने से भारतीय शेयर बाजार धड़ाम, सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट.

मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत काफी कमजोर और गिरावट के साथ हुई। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज यानी होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल के दाम आसमान छूने की वजह से पूरी दुनिया के बाजारों में निवेशकों के बीच डर का माहौल बन गया है। इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल का सीधा असर भारतीय इक्विटी मार्केट पर भी साफ देखने को मिला। कारोबार की शुरुआत में ही बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी दोनों लाल निशान के साथ खुले जिससे निवेशकों को शुरुआती घंटों में ही बड़ा झटका लगा। बाजार के इस रुख ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में भी वैश्विक हलचल का असर घरेलू बाजार पर बना रहेगा।

सेंसेक्स और निफ्टी में शुरुआती कारोबार का हाल

कारोबार की शुरुआत में बेंचमार्क बीएसई सेंसेक्स 216.63 अंक या 0.28 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 78,325.81 अंक पर खुला। वहीं दूसरी ओर, एनएसई निफ्टी 50 ने भी दिन की शुरुआत 54.75 अंक यानी 0.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,529 अंक पर की। समाचार एजेंसी ANI News की रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती आंकड़ों में बीएसई सेंसेक्स 78,347.74 अंक पर था जो 194.70 अंक यानी 0.25 प्रतिशत नीचे था। इसके अलावा एनएसई निफ्टी 50 24,539.75 अंक पर दर्ज किया गया जो 44.05 अंक यानी 0.18 प्रतिशत की गिरावट दिखा रहा था। जैसे-जैसे सुबह का कारोबार आगे बढ़ा, गिरावट का यह सिलसिला थमा नहीं बल्कि सेंसेक्स 158.62 अंक और लुढ़ककर 78,340.55 अंक पर आ गया और निफ्टी भी 45.20 अंक फिसलकर 24,524.95 अंक पर बंद होने के करीब पहुंच गया।

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स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज और क्रूड ऑयल संकट

भारतीय बाजारों में इस बड़ी गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर चल रहा अनिश्चितता का माहौल है, जो दुनिया भर में तेल की सप्लाई का एक बहुत ही महत्वपूर्ण रास्ता है। इस जलमार्ग को दोबारा खोलने के लिए चल रही उम्मीदें अब धुंधली पड़ती जा रही हैं, जिससे कच्चे तेल की कीमतें तेजी से ऊपर जा रही हैं। क्रूड ऑयल के महंगे होने से एक बार फिर दुनिया भर में महंगाई बढ़ने का डर पैदा हो गया है। ईरान की तरफ से इस रास्ते को तुरंत खोलने को लेकर कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिले हैं। ईरान के विदेश मंत्री सेयद अब्बास अरागची ने साफ कहा है कि इस समय अमेरिका के साथ कोई सीधी बातचीत नहीं चल रही है। इसके अलावा एक अन्य ईरानी अधिकारी बाघाएई ने भी दो टूक कहा है कि जब तक अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी जारी रहेगी, तब तक इस रास्ते को दोबारा चालू करने के लिए हालात अनुकूल नहीं हो सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तरफ से पुराने संघर्षों में हुए नुकसान के मुआवजे की मांग को लेकर दिए गए बयानों ने इस कूटनीतिक तनाव को और ज्यादा बढ़ा दिया है, जिससे वैश्विक बाजार में अनिश्चितता और गहरी हो गई है।

मार्केट एक्सपर्ट्स की राय और संस्थागत निवेशकों का डेटा

बाजार के जानकारों और एक्सपर्ट्स का मानना है कि वैश्विक मोर्चे पर चल रहे इन जोखिमों का असर अभी कुछ और दिनों तक देखने को मिल सकता है। एक्सिस डायरेक्ट के रिसर्च हेड राजेश पालविया ने कहा है कि महंगे क्रूड ऑयल के दाम बाजार के लिए एक बड़ा जोखिम बने हुए हैं। चॉइस ब्रोकिंग प्राइवेट लिमिटेड के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट हितेश टेलर ने भी चेतावनी दी है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और जियोपॉलिटिकल तनाव बाजार की तेजी को रोक सकते हैं। आईजी के मार्केट एनालिस्ट टोनी साइमोर ने इस पूरी स्थिति को अमेरिका और ईरान के बीच एक तनातनी यानी मैक्सिकन स्टैंडऑफ़ बताया है। इस तनाव का असर पिछले कुछ दिनों से लगातार वैश्विक बाजारों पर पड़ रहा है, और अमेरिकी शेयर बाजार भी सोमवार को अपने रिकॉर्ड हाई लेवल से नीचे आ गए थे। बाजार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले दिन यानी 10 अगस्त 2026 को विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII ने कुल 1,974.76 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की थी, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII ने कुल 1,290.29 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की थी।

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