दुबई और अबू धाबी में पिछले कुछ समय में कई भारतीय प्रवासियों की मौत की खबरें सामने आई हैं. इन घटनाओं ने प्रवासी भारतीयों और उनके परिवारों के बीच चिंता बढ़ा दी है. प्रभावित परिवार अब सरकार से मदद और मृतक के लिए सरकारी नौकरी की मांग कर रहे हैं, ताकि उनके परिवार का सहारा बना रहे.

दुबई और अबू धाबी में हुई मौतों का विवरण

हाल के दिनों में अलग-अलग राज्यों के भारतीय नागरिकों की यूएई में दुखद मृत्यु हुई है. कुछ मामलों में लापरवाही और प्रताड़ना के आरोप भी लगे हैं.

नाम और स्थान घटना की तारीख मुख्य जानकारी
मनोज महतो (बोकारो, झारखंड) मार्च 2026 संदिग्ध मौत, परिवार ने मारपीट और प्रताड़ना का आरोप लगाया है.
अभय कुमार (बक्सर, बिहार) 30 मार्च 2026 मृत्यु की सूचना मिली, लेकिन मौत का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं है.
मोहम्मद रमजान (पंजाब) 15 मार्च 2026 कथित तौर पर अज्ञात हमलावरों ने हत्या कर दी.
भारतीय नागरिक (अबू धाबी) 27 मार्च 2026 मलबा गिरने की वजह से दुखद मौत हुई.

शव वापसी और सरकारी नियमों की जानकारी

यूएई में किसी भारतीय नागरिक की मृत्यु होने पर शव को वापस भारत लाने के लिए कुछ कानूनी नियम और सहायता उपलब्ध हैं, जिन्हें जानना हर प्रवासी के लिए जरूरी है.

  • नियोक्ता की जिम्मेदारी: यूएई के कानून संख्या (33) 2021 के मुताबिक, अगर परिवार मांग करता है, तो शव को गृह देश भेजने का पूरा खर्च कंपनी या प्रायोजक उठाएगा.
  • ICWF फंड की मदद: अगर कंपनी खर्च नहीं उठाती या बीमा नहीं है, तो भारतीय महावाणिज्य दूतावास ICWF के तहत गरीब परिवारों को वित्तीय सहायता दे सकता है.
  • दूतावास की भूमिका: भारतीय दूतावास और महावाणिज्य दूतावास यूएई अधिकारियों के साथ मिलकर शव वापसी और कानूनी कागजी कार्रवाई में मदद करते हैं.
  • सुप्रीम कोर्ट का दखल: कुछ मामलों में शव वापस लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार से जवाब मांगा है.
Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com