भारतीय नौसेना ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए LPG कैरियर जहाज Shivalik को Strait of Hormuz से सुरक्षित बाहर निकाला है। भारत सरकार और नौसेना की तालमेल से यह जहाज सुरक्षित रूप से गुजरात पोर्ट पहुंच गया है। इस जहाज में करीब 40,000 टन लिक्विफाइड गैस लदी हुई थी, जिसे सुरक्षित पहुंचाना भारत के लिए ज़रूरी था।
Operation Urja Suraksha के तहत हुई कार्रवाई
यह पूरा मिशन ‘Operation Urja Suraksha’ के तहत चलाया गया। सरकार ने यह पहल परशियन गल्फ में अमेरिका, इसराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए शुरू की है। इस ऑपरेशन के लिए भारतीय नौसेना ने ओमान की खाड़ी और उत्तरी अरब सागर में 5 से ज़्यादा बड़े युद्धपोत तैनात किए थे, जिनमें Visakhapatnam-class के डिस्ट्रॉयर भी शामिल थे। इन जहाजों ने LPG, LNG और कच्चे तेल से भरे टैंकरों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए एस्कॉर्ट किया।
समय पर डिलीवरी के लिए विशेष इंतजाम
Shivalik जहाज 7 और 8 जुलाई 2026 के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रणनीतिक रास्ते से गुजरा और 8 जुलाई की शाम को गुजरात पोर्ट पहुंचा। जहाज के आते ही अधिकारियों ने कागजी कार्रवाई में तेज़ी दिखाई और उसे प्राथमिकता के आधार पर बर्थिंग दी, ताकि गैस उतारने में कोई देरी न हो।
क्षेत्रीय तनाव और भारत की रणनीति
इस मिशन के दौरान कूटनीतिक माहौल काफी जटिल था। ईरान ने तीन जब्त जहाजों—Star, Jaf और Stellar Ruby—को छोड़ने के बदले भारतीय जहाजों के सुरक्षित passage की बात की थी। भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए Strait of Hormuz और Bab-al-Mandab के पास मिशन-आधारित तैनाती की है, क्योंकि भारत का 90% व्यापार समुद्र के रास्ते होता है।
भारतीय नाविकों के लिए हेल्पलाइन
क्षेत्र में अस्थिरता को देखते हुए विदेश मंत्रालय (MEA) ने खास इंतजाम किए हैं। वहां मौजूद 3,000 से ज़्यादा भारतीय नाविकों और नागरिकों की मदद के लिए एक समर्पित कंट्रोल रूम बनाया गया है और 24 घंटे चलने वाली हेल्पलाइन शुरू की गई है ताकि किसी भी मुश्किल वक्त में उन्हें तुरंत सहायता मिल सके।
