भारतीय नौसेना ने एक बार फिर अपनी ताकत दिखाते हुए दो बड़े एलपीजी टैंकरों को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। इन जहाजों में करीब 94,000 मीट्रिक टन गैस भरी हुई है जो भारत की करीब एक दिन की रसोई गैस की जरूरत के बराबर है। सुरक्षित इलाके में पहुंचने के बाद जहाज के चालक दल ने खुशी में भारत माता की जय के नारे लगाए। नौसेना के युद्धपोतों ने इन टैंकरों को ओमान की खाड़ी तक सुरक्षित रास्ता दिखाया और एस्कॉर्ट किया।

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जहाजों के नाम और भारत पहुंचने की तारीख

भारत आ रहे इन दोनों टैंकरों की निगरानी सरकार के अलग-अलग मंत्रालय मिलकर कर रहे हैं। इनके आगमन की पूरी जानकारी नीचे दी गई है:

जहाज का नाम पहुंचने की तारीख बंदरगाह का नाम
BW TYR 31 मार्च, 2026 मुंबई
BW ELM 1 अप्रैल, 2026 न्यू मैंगलोर
कुल मात्रा 94,000 मीट्रिक टन भारत

शिपिंग महानिदेशालय का कंट्रोल रूम इस समय 24 घंटे काम कर रहा है। पिछले 24 घंटों में अधिकारियों ने 92 कॉल और 120 ईमेल के जरिए जहाजों की लोकेशन और सुरक्षा का जायजा लिया है ताकि सप्लाई में कोई रुकावट न आए।

ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा के तहत मिली सुरक्षा

भारतीय नौसेना ने समुद्री रास्तों पर तेल और गैस टैंकरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खास इंतजाम किए हैं। इसके बारे में मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा के तहत क्षेत्र में आधे दर्जन से अधिक युद्धपोत तैनात किए हैं।
  • यह युद्धपोत भारत आने वाले तेल, एलपीजी और एलएनजी टैंकरों को सुरक्षित रास्ता प्रदान करते हैं।
  • ईरान ने भारत जैसे मित्र देशों के जहाजों को अपने अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाकर निकलने की अनुमति दी है।
  • अभी भी फारस की खाड़ी में भारत के 18 और टैंकर मौजूद हैं जो जल्द ही भारतीय तटों पर पहुंचेंगे।
  • पेट्रोलियम मंत्रालय ने जनता को आश्वासन दिया है कि देश में एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक है और घबराने की जरूरत नहीं है।

इससे पहले भी मार्च के महीने में शिवालिक, नंदा देवी, पाइन गैस और जग वसंत जैसे चार टैंकर इसी रास्ते से सुरक्षित भारत लाए जा चुके हैं। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और पैनिक बुकिंग करने से बचें क्योंकि सप्लाई पूरी तरह सामान्य है।