Indian Oil Corporation (IOC) के चेयरमैन Arvinder Singh Sahney ने साफ किया है कि भारत के पास कच्चा तेल पर्याप्त मात्रा में है। उन्होंने 31 जुलाई 2026 को जानकारी दी कि कंपनी के पास अगले 45 दिनों की खपत के लिए तेल का स्टॉक मौजूद है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब दुनिया भर में भू-राजनीतिक हालात अस्थिर बने हुए हैं।
वित्तीय नुकसान और चुनौतियां
अप्रैल-जून तिमाही (Q1 FY27) के दौरान IOC को 2,661.37 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। कंपनी ने बताया कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद पेट्रोल और डीजल के दाम कम बनाए रखने की वजह से यह घाटा हुआ है। वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव ने भी इन खर्चों को बढ़ाने का काम किया है, लेकिन कंपनी ने अपनी कार्यकुशलता के दम पर नुकसान को नियंत्रित करने की कोशिश की है। विदेशी मुद्रा के दबाव को कम करने के लिए कंपनी ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मदद से 500 मिलियन डॉलर की राशि भी जुटाई है।
तेल की सप्लाई और नए रास्ते
रेड सी में चल रहे जहाजों के संकट के कारण IOC ने तेल मंगवाने के तरीकों में बदलाव किया है। अब कंपनी सऊदी अरब से तेल मंगाने के लिए अफ्रीका के लंबे समुद्री रास्ते का इस्तेमाल कर रही है। इसके अलावा, साउथ अमेरिका और वेस्ट अफ्रीका से भी तेल की खरीद की जा रही है। वर्तमान में IOC के रिफाइनरियों में कुल तेल का लगभग 48% हिस्सा रूस से आ रहा है।
सरकार की नई पहल
भारत सरकार अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ‘Samudra Manthan’ नाम की एक नई योजना पर काम कर रही है। इस योजना के लिए 84,084 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है, जो FY 2030-31 तक पूरा किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य समुद्र के अंदर तेल की खोज और उत्पादन को तेज करना है ताकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आत्मनिर्भर बन सके।
