भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक बड़ी जानकारी दी है। उन्होंने साफ़ किया है कि पासपोर्ट सिर्फ यात्रा के लिए एक दस्तावेज़ है और इसे नागरिकता का पक्का सबूत नहीं माना जा सकता। यह बात 24 जून 2026 को 14वें पासपोर्ट सेवा दिवस के मौके पर बताई गई ताकि लोगों के बीच फैली उलझन को दूर किया जा सके।

सरकार ने यह भी बताया कि यह कोई नई पॉलिसी नहीं है बल्कि पिछले 12 सालों से यही कानूनी स्थिति है। पासपोर्ट एक्ट 1967 के सेक्शन 20 के मुताबिक, केंद्र सरकार उन लोगों को भी पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज़ जारी कर सकती है जो भारतीय नागरिक नहीं हैं, बशर्ते यह जनहित में ज़रूरी हो। इसी वजह से पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता।

भारतीय नागरिकता तय करने के लिए संविधान के आर्टिकल 5 से 11 और नागरिकता अधिनियम 1955 के नियमों का पालन किया जाता है। कोर्ट ने भी समय-समय पर यह बात कही है। 2013 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा था कि सिर्फ पासपोर्ट होने से कोई व्यक्ति नागरिक साबित नहीं होता। इसी तरह सुप्रीम कोर्ट ने भी साफ़ किया है कि आधार कार्ड केवल पहचान का दस्तावेज़ है, नागरिकता का सबूत नहीं।

नागरिकता साबित करने के लिए कुछ खास दस्तावेज़ों की ज़रूरत होती है। इनमें मुख्य रूप से ये शामिल हैं:

  • पुराने जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificates)
  • माता-पिता का नागरिकता प्रमाण पत्र या उनका भारतीय पासपोर्ट
  • गृह मंत्रालय द्वारा जारी किया गया नागरिकता प्रमाण पत्र (खासकर उनके लिए जिन्होंने रजिस्ट्रेशन या नेचुरललाइजेशन के ज़रिए नागरिकता ली है)
  • अन्य रिकॉर्ड जो जन्म या राष्ट्रीयता को साबित करें

MEA के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर काफी बहस छिड़ गई। कवि जावेद अख्तर, आदित्य ठाकरे, असदुद्दीन ओवैसी, कपिल सिब्बल और महुआ मोइत्रा जैसे सार्वजनिक हस्तियों और नेताओं ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। कुछ लोगों ने इस बात का मज़ाक भी उड़ाया, लेकिन सरकार ने दोहराया कि उन्होंने सिर्फ मौजूदा कानून की जानकारी साझा की है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.