भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया में काफी बड़ी हो गई है, लेकिन जब पासपोर्ट की ताकत की बात आती है तो भारत अभी भी पीछे है। नए Henley Passport Index 2026 के मुताबिक, भारतीय पासपोर्ट दुनिया के टॉप 50 देशों की लिस्ट में जगह नहीं बना पाया है। भारत इस लिस्ट में 80वें स्थान पर है, जिससे विदेश यात्रा करने वाले आम लोगों और प्रवासियों को अब भी काफी वीज़ा प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।
पासपोर्ट रैंकिंग और वीज़ा की स्थिति
Henley Passport Index 2026 के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय पासपोर्ट धारक दुनिया के 56 देशों में बिना किसी पहले से लिए गए पारंपरिक वीज़ा के जा सकते हैं। इसमें वीज़ा-फ्री, अराइवल पर मिलने वाला वीज़ा या ई-ट्रैवल ऑथराइजेशन शामिल है। लेकिन, दुनिया के कुल 227 देशों में से 170 जगहों पर जाने के लिए भारतीयों को पहले से वीज़ा लेना जरूरी है।
पुराना रिकॉर्ड और बदलाव
अगर पुराने समय की बात करें तो भारत की रैंकिंग समय-समय पर बदलती रही है। साल 2006 में भारत 71वें नंबर पर था, जो 2012 में गिरकर 82वें और 2015 में 88वें स्थान पर चला गया था। साल 2018 में यह थोड़ा सुधरकर 81वें नंबर पर आया था। साल 2024 में भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए 62 देशों के रास्ते बिना वीज़ा के खुले थे, लेकिन अब यह संख्या 56 रह गई है।
रैंकिंग कम रहने की वजह
Navbharat Times की रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले 10 सालों में भारत ने केवल 4 नए देशों के साथ वीज़ा-मुक्त यात्रा का समझौता किया है। इसके विपरीत, जो देश दुनिया की टॉप रैंकिंग में शामिल हैं, उन्होंने इसी दौरान 10 से 20 नए देशों के साथ ऐसे समझौते किए हैं, जिससे उनकी रैंकिंग और ताकत बढ़ी है।
यह रैंकिंग कैसे तय होती है
यह रैंकिंग Henley & Partners द्वारा तय की जाती है। इसके लिए वे International Air Transport Association (IATA) के डेटा और दुनिया भर की वीज़ा नीतियों पर लगातार नज़र रखते हैं। इस इंडेक्स में कुल 199 पासपोर्ट्स की जांच 227 देशों के लिए की गई है। इसमें केवल उन देशों को गिना जाता है जहाँ बिना पारंपरिक वीज़ा के जाया जा सके।