अगर आपके पास भारतीय पासपोर्ट है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपकी नागरिकता अपने आप साबित हो गई। विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि पासपोर्ट केवल यात्रा के लिए एक दस्तावेज है। बहुत से लोग इसे नागरिकता का पक्का सबूत मानते हैं, लेकिन कानूनी तौर पर ऐसा नहीं है।
विदेश मंत्रालय (MEA) ने जून 2026 में स्पष्ट किया कि भारतीय पासपोर्ट एक यात्रा दस्तावेज (travel document) है, न कि नागरिकता का अंतिम प्रमाण। यह बात 14वें पासपोर्ट सेवा दिवस के दौरान फिर से दोहराई गई। दरअसल, चुनाव आयोग द्वारा वोटर लिस्ट के सुधार के दौरान कुछ लोगों ने पासपोर्ट को नागरिकता के सबूत के तौर पर पेश किया था, जिसके बाद सरकार को यह सफाई देनी पड़ी।
पासपोर्ट और नागरिकता में क्या फर्क है
भारत में नागरिकता के नियम Citizenship Act, 1955 के तहत आते हैं, जबकि पासपोर्ट जारी करने का काम Passports Act, 1967 के तहत होता है। पासपोर्ट एक्ट की धारा 20 सरकार को यह अधिकार देती है कि वह जनहित में गैर-नागरिकों को भी यात्रा दस्तावेज या पासपोर्ट जारी कर सके। इसका मतलब यह हुआ कि सिर्फ पासपोर्ट होने से कोई व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं बन जाता।
भारत में कोई एक ऐसा यूनिवर्सल सर्टिफिकेट नहीं है जो सबको नागरिकता का प्रमाण दे। सिर्फ उन्हीं लोगों को नागरिकता सर्टिफिकेट मिलता है जिन्होंने रजिस्ट्रेशन या नेचुरललाइजेशन के जरिए नागरिकता हासिल की हो। जन्म से नागरिक बने लोगों के पास ऐसा कोई अलग दस्तावेज नहीं होता।
इन दस्तावेजों से नागरिकता साबित नहीं होती
अदालतों और सरकार ने साफ किया है कि पहचान पत्र और नागरिकता के सबूत अलग-अलग होते हैं। निम्नलिखित दस्तावेज नागरिकता का पक्का सबूत नहीं माने जाते:
- Aadhaar Card: यह सिर्फ पहचान और पते का सबूत है।
- PAN Card: यह टैक्स से जुड़ा दस्तावेज है।
- Voter ID: यह केवल मतदान का अधिकार देता है।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी अपने फैसलों में कहा है कि आधार, पैन या वोटर आईडी अकेले किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता तय नहीं कर सकते। नागरिकता साबित करने की जिम्मेदारी खुद उस व्यक्ति की होती है।
जन्म के आधार पर नागरिकता के नियम
नागरिकता अधिनियम 1955 में समय-समय पर बदलाव हुए हैं, जिससे जन्म के आधार पर नागरिकता के नियम बदल गए हैं:
| जन्म की तारीख | नागरिकता का नियम |
|---|---|
| 26 जनवरी 1950 से 1 जुलाई 1987 | माता-पिता की राष्ट्रीयता चाहे जो हो, नागरिकता अपने आप मिली। |
| 1 जुलाई 1987 से 3 दिसंबर 2004 | कम से कम एक माता या पिता का भारतीय नागरिक होना जरूरी था। |
| 3 दिसंबर 2004 के बाद | दोनों माता-पिता भारतीय हों, या एक भारतीय हो और दूसरा अवैध प्रवासी न हो। |
पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने भी बताया कि पासपोर्ट का मुख्य काम अंतरराष्ट्रीय यात्रा करना है। विदेश में यह राष्ट्रीयता का मजबूत सबूत हो सकता है, लेकिन भारत के अंदर कानूनी मामलों में इसे नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।
खासकर उन भारतीयों के लिए यह जानकारी बहुत जरूरी है जो विदेश में रहते हैं या अक्सर यात्रा करते हैं। नागरिकता साबित करने के लिए जन्म की तारीख, जन्म स्थान और माता-पिता की नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों का मेल जरूरी होता है।
