हाथ से कपड़े बुनने वाले कारीगर अपनी पुरानी कला को खो रहे थे क्योंकि उनके बनाए कपड़े सिर्फ म्यूजियम या खास मौकों तक सीमित रह गए थे. अब Indian Peacock नाम की कंपनी ने इन कपड़ों को रोज़ाना पहनने वाले फैशन में लाने की ठानी है. इस पहल से बुनकरों को न सिर्फ काम मिलेगा बल्कि उनकी कमाई भी बढ़ेगी.

Indian Peacock क्या है और इसे किसने शुरू किया?

Indian Peacock की शुरुआत Preethi Pathireddy ने की है जो एक आर्किटेक्ट और Ivy League की छात्रा रह चुकी हैं. उन्होंने अपनी पढ़ाई और कला की समझ को जोड़कर इस ब्रांड को बनाया है. इस कंपनी का मकसद धीरे-धीरे फैशन को बढ़ावा देना और लोगों को जागरूक करना है ताकि पारंपरिक कपड़े रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन सकें.

किन कारीगरों के साथ काम हो रहा है और क्या बन रहा है?

यह ब्रांड भारत के अलग-अलग हिस्सों के बुनकरों के साथ सीधे तौर पर जुड़कर काम करता है. इसमें पश्चिम बंगाल के Jamdani, तेलंगाना के Ikat, राजस्थान के हैंडब्लॉक प्रिंट और आंध्र प्रदेश के Mangalgiri बुनकर शामिल हैं. कंपनी अब सिर्फ भारी कपड़े नहीं बल्कि रोज़ पहनने वाले शर्ट, कुर्ते और कॉर्ड सेट बना रही है ताकि लोग इन्हें ऑफिस या घर पर आसानी से पहन सकें.

बुनकरों को इससे क्या फायदा होगा?

Indian Peacock ने बुनकरों को सिर्फ सामान बेचने वाला नहीं बल्कि अपना पार्टनर बनाया है. उन्हें सही दाम पर पैसा दिया जाता है और साल भर काम मिलता है, जिससे उन्हें अब सिर्फ त्योहारों या शादियों के सीजन का इंतज़ार नहीं करना पड़ता. इस तरीके से पुरानी कला को बचाने और कारीगरों की आर्थिक स्थिति सुधारने की कोशिश की गई है.