भारत के 50 से ज़्यादा मशहूर वैज्ञानिकों ने ईरान, फिलिस्तीन और लेबनान के लोगों और वहां के शिक्षकों के साथ अपनी एकजुटता जताई है. इन physicists ने इसराइल और अमेरिका से जुड़ी लड़ाइयों के दौरान यूनिवर्सिटी और आम नागरिक संस्थानों पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की है. यह पूरी जानकारी 23 अप्रैल 2026 को सामने आई है.

भारतीय वैज्ञानिकों ने हमलों को लेकर क्या कहा

स्ट्रिंग थ्योरी के जानकारों वाले इस ग्रुप ने इन हमलों को ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ बताया है. वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसे हमलों से न केवल लोगों की जान जाती है, बल्कि उन इलाकों में शिक्षा और रिसर्च का भविष्य भी बर्बाद हो जाता है. उन्होंने कहा कि यह नागरिक ठिकानों पर किए जा रहे बड़े हमलों का हिस्सा है जिससे लाखों लोग बेघर हो चुके हैं.

किन शिक्षण संस्थानों को बनाया गया निशाना

  • ईरान: यहाँ के मिनाब में एक प्राइमरी स्कूल पर हमला हुआ जिसमें करीब 170 बच्चों की मौत हुई. शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी का AI सेंटर भी हमले में तबाह हो गया.
  • लेबनान: बेरुत की लेबनानी यूनिवर्सिटी के कैंपस पर ड्रोन हमला हुआ जिसमें दो प्रोफेसरों की जान चली गई.
  • गाजा: यहाँ लगभग सभी यूनिवर्सिटी और स्कूल पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं.

अंतरराष्ट्रीय नियम और अन्य दिग्गजों की चेतावनी

साउथ एशियन एकेडमी ऑफ मैनेजमेंट (SAAM) ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत शैक्षणिक संस्थान सुरक्षित जगह होते हैं और उन पर हमला करना ‘युद्ध अपराध’ माना जाता है. इसके अलावा, दो नोबेल विजेताओं समेत 1400 लोगों ने एक चिट्ठी लिखकर UN और UNESCO से वैज्ञानिक ढांचों की सुरक्षा की मांग की है. किंग कॉलेज लंदन के प्रोफेसर जॉन एलिस ने भी यूनिवर्सिटी पर सैन्य हमलों की कड़ी निंदा की है.

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.