भारतीय रेलवे ने ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ पहल के तहत पांच बड़े सुधारों की घोषणा की है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार 24 मार्च 2026 को इन बदलावों के बारे में जानकारी साझा की। इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य यात्रियों की सुविधा बढ़ाना, माल ढुलाई को तेज करना और रेल प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता में सुधार लाना है। साल 2026 में अब तक भारतीय रेलवे की तरफ से कुल नौ बड़े सुधार पेश किए जा चुके हैं।

यात्रियों की सुविधा और टिकट रिफंड से जुड़े नए नियम क्या हैं?

रेलवे के नए नियम के अनुसार, अब यात्री ट्रेन चलने से मात्र 30 मिनट पहले तक अपना बोर्डिंग स्टेशन ऑनलाइन बदल सकेंगे। पहले यह सुविधा केवल आरक्षण चार्ट तैयार होने से पहले तक ही उपलब्ध थी। इसके अलावा, टिकटों की कालाबाजारी रोकने के लिए रिफंड के नियमों को सख्त किया गया है, जो 1 अप्रैल से 15 अप्रैल 2026 के बीच लागू होंगे। अब ई-टिकट रद्द करने पर रिफंड अपने आप खाते में आ जाएगा और यात्रियों को काउंटर टिकट देश के किसी भी स्टेशन से कैंसिल कराने की सुविधा मिलेगी।

समय सीमा (ट्रेन छूटने से पहले) रिफंड की स्थिति
72 घंटे से ज्यादा अधिकतम रिफंड (कैंसलेशन चार्ज काटकर)
72 से 24 घंटे के बीच किराये का 25% कटेगा
24 से 8 घंटे के बीच किराये का 50% कटेगा
8 घंटे से कम कोई पैसा वापस नहीं मिलेगा

माल ढुलाई और रेलवे निर्माण कार्यों में किए गए बड़े बदलाव

रेलवे ने नमक की ढुलाई के लिए खास स्टेनलेस स्टील के कंटेनर तैयार किए हैं। ये कंटेनर जंगरोधी हैं और इनकी उम्र 15 से 20 साल तक होगी। साथ ही ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को अब अपनी जरूरत के हिसाब से वैगन डिजाइन करने की आजादी दी गई है, जिससे कारों और अन्य गाड़ियों को ले जाना आसान होगा। निर्माण कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए भी सात नए नियम बनाए गए हैं। अब बड़ी परियोजनाओं में केवल वही कंपनियां हिस्सा ले पाएंगी जिनके पास रेलवे प्रोजेक्ट्स का पुराना अनुभव होगा।

  • बोर्डिंग स्टेशन: यात्री अब मूल स्टेशन से ट्रेन छूटने के 30 मिनट पहले तक स्टेशन बदल सकते हैं।
  • रिफंड सुविधा: ई-टिकट के लिए अब TDR भरने की जरूरत नहीं होगी, पैसा अपने आप वापस आएगा।
  • निर्माण गुणवत्ता: ठेकेदारों के लिए पात्रता सीमा को 35% से बढ़ाकर 50% कर दिया गया है।
  • भ्रष्टाचार पर रोक: सब-कॉन्ट्रैक्टिंग की सीमा को 70% से घटाकर 40% किया गया है।