भारतीय रुपया शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था। हालांकि, दिन के आखिर में यह 91.88 पर बंद हुआ। बाद में भू-राजनीतिक चिंताएं कम होने के बाद रुपया थोड़ा सुधरकर 91.41 पर आया।

रुपया कितना नीचे गिरा?

भारतीय रुपया एक समय में डॉलर के मुकाबले 92 के अभूतपूर्व स्तर तक चला गया था। दिन के अंत में यह 91.88 पर बंद हुआ। इस हफ्ते यह एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा रहा।

रुपया गिरने की मुख्य वजह क्या है?

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने जनवरी के पहले 22 दिनों में भारतीय शेयरों से 36,500 करोड़ रुपये निकाले। इससे पहले 2025 में भी 18.91 बिलियन डॉलर की निकासी हुई थी। इस वजह से डॉलर की मांग लगातार बनी रही, जिससे रुपये पर दबाव पड़ा।

अंतर्राष्ट्रीय बाजार का क्या असर रहा?

अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में व्यापार तनाव, भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं, भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता का रुकना और राष्ट्रपति ट्रंप की अमेरिकी टैरिफ नीतियों के कारण जोखिम से बचने का माहौल बना रहा। इन सब कारणों से रुपये का मूल्य गिरा।

रुपये में सुधार क्यों हुआ?

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने यूरोप के खिलाफ टैरिफ की धमकियों पर अपना रुख नरम किया। इससे निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता बढ़ी और उभरते बाजारों की मुद्राओं को थोड़ा सुधारने का मौका मिला। इसके बाद रुपया 17 पैसे मजबूत होकर 91.41 पर पहुंच गया।

GulfHindi Desk

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