भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक गिरावट का सामना कर रहा है. 19 मार्च 2026 को रुपया पहली बार 93 के स्तर को पार कर 93.37 तक पहुंच गया. विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण यह गिरावट जारी रह सकती है और भाव 95 रुपये प्रति डॉलर तक जा सकता है. भारतीय रिजर्व बैंक बाजार को संभालने के लिए सक्रिय है लेकिन डॉलर की मजबूती रुपये पर भारी पड़ रही है.

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रुपये में गिरावट के मुख्य कारण क्या हैं?

रुपये की इस रिकॉर्ड कमजोरी के पीछे कई बड़े कारण बताए जा रहे हैं. गोल्डमैन सैक्स के विशेषज्ञों के अनुसार मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के आयात बिल को बढ़ा रही हैं. इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने के फैसले से डॉलर मजबूत हुआ है. विदेशी निवेशकों (FIIs) ने मार्च के महीने में भारतीय बाजार से लगभग 70,989 करोड़ रुपये निकाले हैं जिससे रुपये की वैल्यू कम हुई है.

आम जनता और प्रवासियों पर क्या होगा असर?

रुपये के कमजोर होने से भारत में पेट्रोल, डीजल और इलेक्ट्रॉनिक सामान जैसे मोबाइल-लैपटॉप महंगे हो सकते हैं. जो लोग विदेश में पढ़ाई कर रहे हैं या यात्रा पर जा रहे हैं उन्हें अब ज्यादा खर्च करना होगा. हालांकि सऊदी अरब और दुबई जैसे खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों के लिए यह अच्छी खबर है क्योंकि उन्हें अब भारत पैसे भेजने पर पहले से ज्यादा वैल्यू मिलेगी. भारत की जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को भी गोल्डमैन सैक्स ने 7.0% से घटाकर 6.5% कर दिया है.

तारीख रुपये का भाव (प्रति डॉलर)
19 मार्च, 2026 93.37 (सबसे निचला स्तर)
18 मार्च, 2026 92.63
13 मार्च, 2026 92.48
Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.