भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है और यह 100 रुपये प्रति डॉलर के आंकड़े के बेहद करीब है। 20 मई 2026 को रुपया गिरकर प्रति डॉलर 97 के स्तर पर आ गया, जिसका सीधा मतलब है कि अब एक यूएई दिर्हाम की कीमत लगभग 26.38 रुपये हो गई है। इस बदलाव से संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई में रहने वाले भारतीय प्रवासियों में हलचल बढ़ गई है क्योंकि उन्हें अब भारत पैसे भेजने पर पहले से ज्यादा फायदा मिल रहा है।

रुपया कमजोर होने से यूएई प्रवासियों को क्या फायदा हो रहा है?

जब भारतीय रुपया कमजोर होता है, तो खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों को बड़ा फायदा मिलता है। उनकी दिर्हाम में होने वाली कमाई भारत में अधिक रुपयों में बदल जाती है। अल अंसारी एक्सचेंज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अली अल नज्जार ने बताया कि इस समय भारत पैसे भेजने वाले प्रवासियों की संख्या में काफी बढ़त देखी गई है, विशेष रूप से ईद-अल-अधा के त्योहार से ठीक पहले लोग इस मौके का जमकर फायदा उठा रहे हैं। इस अतिरिक्त पैसे से प्रवासियों को भारत में अपने परिवार के खर्चों, बच्चों की पढ़ाई की फीस, लोन की किश्तें चुकाने और निवेश करने में काफी मदद मिल रही है।

विशेषज्ञों और सरकारी नियमों की क्या है स्थिति?

सोलहवें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई को सलाह दी है कि रुपये को 100 के आंकड़े तक जाने से जबरन रोकने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। उनका मानना है कि भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत है और महंगाई काबू में है, इसलिए रुपये की गिरावट को बाजार के भरोसे छोड़ देना चाहिए। वहीं केडिया एडवाइजरी के अजय सुरेश केडिया का अनुमान है कि अगले छह महीनों में रुपया 91.70 से 99.50 के दायरे में रहेगा।

भारत सरकार के रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार विदेशों से भारत पैसे भेजने और वापस लाने के लिए कड़े नियम बने हुए हैं, जिन्हें नीचे दी गई तालिका में आसानी से समझा जा सकता है।

नियम और सीमाएं विवरण
लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) भारतीय नागरिक एक वित्तीय वर्ष में 2.50 लाख अमेरिकी डॉलर तक बाहर भेज सकते हैं।
NRO खाता रिपेट्रिएशन प्रवासी भारतीय अपने एनआरओ खाते से सालाना 10 लाख अमेरिकी डॉलर तक विदेश वापस ले जा सकते हैं।
जायदाद की बिक्री से मिला पैसा अधिकतम दो आवासीय संपत्तियों की बिक्री से मिली रकम को टैक्स नियमों के तहत विदेश वापस भेजा जा सकता है।
रुपये की गिरावट का कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें (भारत 80-85% तेल आयात करता है) और वैश्विक तनाव इसके मुख्य कारण हैं।

क्या इस गिरावट से प्रवासियों को कोई नुकसान भी है?

फायदों के बीच उन प्रवासियों को नुकसान भी हो सकता है जिन्होंने पहले भारत में निवेश किया हुआ है। जब वे भारत से अपना निवेश वापस निकालकर उसे दिर्हाम या डॉलर में बदलेंगे, तो कमजोर रुपये के कारण उन्हें कम विदेशी मुद्रा मिलेगी। इस नुकसान से बचने के लिए वित्तीय जानकार प्रवासियों को एफसीएनआर यानी फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट डिपॉजिट और गिफ्ट सिटी के म्यूचुअल फंड्स में निवेश करने की सलाह देते हैं, जो विदेशी मुद्रा में ही काम करते हैं।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या रुपया गिरने से यूएई से भारत पैसे भेजना सस्ता हो गया है?

हां, रुपया कमजोर होने से आपके द्वारा भेजे गए एक दिर्हाम के बदले भारत में ज्यादा रुपये मिलते हैं। वर्तमान में यह दर लगभग 26.38 रुपये प्रति दिर्हाम के स्तर पर है।

क्या एनआरआई भारत से अपनी संपत्ति बेचकर सारा पैसा वापस यूएई ला सकते हैं?

फेमा (FEMA) के नियमों के अनुसार, प्रवासी भारतीय अपने एनआरओ खाते के माध्यम से एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 10 लाख अमेरिकी डॉलर तक की राशि टैक्स नियमों को पूरा करने के बाद वापस ला सकते हैं।

कच्चे तेल का रुपये की कमजोरी से क्या संबंध है?

भारत अपनी जरूरत का लगभग 80 से 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। जब कच्चे तेल की कीमत या डॉलर मजबूत होता है, तो भारत को अधिक भुगतान करना पड़ता है, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ता है।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.