खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों के लिए डॉलर की कीमत बहुत मायने रखती है क्योंकि इसी से तय होता है कि घर भेजे गए पैसे की वैल्यू क्या होगी। मौजूदा समय में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले काफी दबाव में है और इसकी कीमत गिर रही है। Union Bank of India की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्लोबल तनाव और तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से रुपये पर खतरा बढ़ा है।

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रुपये की कीमत गिरने की मुख्य वजह क्या हैं?

रुपये की गिरावट के पीछे तीन बड़े कारण बताए गए हैं। पहला है मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव और ईरान-अमेरिका के बीच विवाद, जिससे बाज़ार में घबराहट है। दूसरा कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं, जिससे भारत का खर्चा बढ़ जाता है। तीसरा कारण अमेरिकी डॉलर का मज़बूत होना और विदेशी निवेशकों द्वारा भारत से पैसा निकालना है।

RBI ने रुपये को संभालने के लिए क्या किया?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये की गिरावट को रोकने के लिए कई कड़े कदम उठाए हैं। बैंकों और कंपनियों के लिए पोजीशन लिमिट तय की गई है और बैंकों के लिए नेट ओपन पोजीशन की सीमा 100 मिलियन डॉलर रखी गई है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि अब रुपया अपनी स्थानीय करेंसी की तरह लचीला रहेगा। साथ ही, सट्टेबाजी को रोकने के लिए नियमों को सख्त किया गया है।

रुपये के उतार-चढ़ाव का पूरा हिसाब

तारीख डॉलर के मुकाबले भाव
13 मार्च 2026 92.48
20 मार्च 2026 93.49
30 मार्च 2026 95.30
1 अप्रैल 2026 95.00 के पार
6 अप्रैल 2026 93.00
7 अप्रैल 2026 93.00 (प्रोविज़नल)
9 अप्रैल 2026 92.59