9 मार्च 2026 को भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाज़ार में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 92.31 पर पहुंच गया है। ट्रेडिंग के दौरान यह 92.35 तक भी गया था। वहीं, शेयर बाज़ार खुलते ही Nifty 50 में भारी गिरावट आई और यह 23,700 के स्तर तक लुढ़क गया। सेंसेक्स में भी 2000 से अधिक अंकों की गिरावट दर्ज की गई है जिससे निवेशकों के करोड़ों रुपये डूब गए हैं।

बाज़ार और रुपये में गिरावट का मुख्य कारण क्या है?

इस भारी गिरावट के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय कारण और विदेशी निवेशकों का पैसा निकालना शामिल है। बाजार के जानकारों के अनुसार इसके कुछ मुख्य कारण इस प्रकार हैं:

  • West Asia में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण वैश्विक बाज़ारों में डर का माहौल बना हुआ है।
  • विदेशी निवेशकों (FII) ने भारतीय बाज़ार से अपना पैसा तेज़ी से निकाला है। केवल 6 मार्च को ही बाज़ार में 6,030 करोड़ रुपये की बिकवाली हुई थी।
  • कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें 100 से 110 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की सप्लाई रुकने की आशंका ने बाज़ार को डरा दिया है।

आम आदमी और देश पर इसका क्या असर होगा?

रुपये के कमज़ोर होने और कच्चे तेल के महंगे होने से सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला है। भारत में पेट्रोल और डीज़ल के दाम बढ़ सकते हैं, जिससे ट्रांसपोर्टेशन और रोज़मर्रा की चीज़ें महंगी हो जाएंगी। इसके अलावा विदेश से आयात होने वाला सामान भी महंगा हो जाएगा। सरकार पर भी खाद और LPG गैस सब्सिडी का खर्च बढ़ेगा। हालांकि, रुपये को और अधिक गिरने से बचाने के लिए RBI ने बाज़ार में दखल दिया है और डॉलर की बिक्री की है, जिससे यह 92.50 के पार नहीं जा सका।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.