छत्तीसगढ़ के एक युवा मर्चेंट नेवी ऑफिसर Rudransh Chaubey ने समुद्र के बीच युद्ध जैसी स्थिति का सामना किया। Strait of Hormuz में वे अपने 21 साथियों के साथ तीन महीने तक फंसे रहे। अब घर लौटने के बाद उन्होंने अपनी आपबीती सुनाई है कि कैसे उन्होंने मौत को करीब से देखा और भारत सरकार की मदद से सुरक्षित बाहर निकले।
Strait of Hormuz में कैसा था माहौल
Rudransh Chaubey दिसंबर 2025 में Egypt से जहाज पर सवार हुए थे और फरवरी 2026 के पहले हफ्ते में उनका जहाज Strait of Hormuz पहुँचा। वहाँ हालात इतने खराब थे कि हर तरफ डर और अनिश्चितता का माहौल था। जहाज पर कुल 22 क्रू मेंबर्स थे। शुरुआत में किसी को नहीं पता था कि आगे क्या होगा, जिससे सभी के बीच घबराहट थी।
भारत सरकार ने कैसे की मदद
इस मुश्किल घड़ी में भारत सरकार ने नाविकों का पूरा साथ दिया। सरकार ईमेल और अन्य माध्यमों से लगातार संपर्क में थी। Directorate General of Shipping ने एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया था ताकि नाविक अपनी समस्या बता सकें। सरकारी गाइडलाइन्स मिलने के बाद ही चालक दल के सदस्यों में हिम्मत आई और वे इस कठिन स्थिति से लड़ सके। वर्तमान में भी सरकार Gulf क्षेत्र में भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए हाई अलर्ट पर है।
किन कारणों से मची अफरा-तफरी
ईरान द्वारा Strait of Hormuz बंद करने की खबरों और अमेरिका द्वारा लगाए गए ब्लॉकेड की वजह से जहाजों के लिए रास्ता मुश्किल हो गया था। वहां Arab देशों को मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकते हुए देखा गया।
- शुरू में कोई स्पष्ट निर्देश नहीं थे जिससे चालक दल के बीच पैनिक जैसी स्थिति थी।
- बाद में विभिन्न एजेंसियों से सुरक्षा प्रक्रियाओं और मिसाइल हमलों से बचने के तरीके बताए गए।
- International Bargaining Forum ने भी जहाजों को किन रास्तों पर चलना है और किनसे बचना है, इसके निर्देश दिए।
काफी अनिश्चितता के बाद शिप कंपनी ने अपना कार्गो Bahrain पहुँचाने का फैसला किया, जिसके बाद वे सुरक्षित बाहर निकल सके।
