शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, सेंसेक्स और निफ्टी हुए धड़ाम, तेल की कीमतों में उछाल और ईरान-अमेरिका तनाव बना वजह.

भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत आज 19 अगस्त 2026 को बेहद कमजोर और सुस्त माहौल के साथ हुई। बाजार के निवेशकों का मूड तेहरान और वाशिंगटन के बीच स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोन को लेकर चल रहे तनाव और बयानों की वजह से काफी खराब हो गया था। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक BSE Sensex पिछले बंद 77,235.46 के मुकाबले मामूली गिरावट के साथ 77,218.05 पर खुला। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का Nifty 50 भी 24,200 के अहम स्तर से नीचे फिसल गया। इस भारी उथल-पुथल के बीच बाजार से जुड़े तमाम छोटे-बड़े निवेशक अपने पैसों को लेकर काफी चिंता में नजर आए।
कारोबार आगे बढ़ने पर और गहराया दबाव
जैसे-जैसे दिन का कारोबार आगे बढ़ा, वैसे-वैसे बाजार पर बिकवाली का दबाव और ज्यादा तेज होता चला गया। कारोबार के दौरान Sensex में 244.91 अंकों यानी करीब 0.32 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई और यह लुढ़ककर 76,990.55 के आसपास ट्रेड करने लगा। इसके साथ ही Nifty 50 भी फिसलकर 24,072.25 के स्तर के करीब आ गया, जिसमें 82.65 अंकों या 0.34 प्रतिशत की गिरावट साफ देखी गई। इस गिरावट के साथ ही बाजार लगातार सातवें सत्र में नुकसान की तरफ बढ़ता हुआ दिख रहा है। इससे पहले मंगलवार 18 अगस्त को भी बाजार भारी कमजोरी के साथ 24,154.90 के स्तर पर बंद हुआ था, जिससे निवेशकों को लगातार नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से बढ़ी चिंता
व्यापक बाजार को इस समय कई बड़ी और गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऑटोमोबाइल, मेटल, पीएसयू बैंक, रियल्टी, कंज्यूमर ड्यूरिंग्स, फाइनेंशियल सर्विसेज, केमिकल्स और सीमेंट जैसे तमाम बड़े सेक्टरों के शेयरों पर भारी बिकवाली का दबाव बना हुआ है। हालांकि इसके उलट, एफएमसीजी, आईटी, ऑयल एंड गैस और टेलीकॉम सेक्टर के शेयरों में शुरुआती कारोबार के दौरान कुछ बढ़त जरूर दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक तनाव की वजह से ब्रेंट क्रूड ऑयल यानी कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर लगभग 92 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। कच्चे तेल की कीमतें लगातार चौथे दिन बढ़ने की वजह से देश के भीतर घरेलू महंगाई और सामानों के आयात का खर्च बढ़ने की आशंका काफी ज्यादा बढ़ गई है।
विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों का रुख
बीते दिन यानी 18 अगस्त 2026 के वित्तीय आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs ने भारतीय बाजार में कुल 1,652 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की थी। वहीं दूसरी तरफ, घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DIIs ने भी बाजार में भरोसा दिखाते हुए कुल 2,579.31 करोड़ रुपये के शेयरों में निवेश किया। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के जाने-माने बाजार विशेषज्ञ सिद्धार्थ खेमका ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि ऊंचे दामों पर चल रहे कच्चे तेल और प्रमुख सूचकांकों के कमजोर होते तकनीकी चार्ट पैटर्न की वजह से बाजार का आने वाला समय अभी काफी सतर्कता भरा रहने वाला है। इसके अलावा डॉलर की भारी मांग और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में लगातार हो रही तेजी के बीच भारतीय रुपया भी दबाव में है, जिस पर देश का केंद्रीय बैंक लगातार नजर बनाए हुए है। इस पूरी खबर के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए आप ANI News की रिपोर्ट देख सकते हैं।