Red Sea Attack: यमन के पास डूबा भारतीय जहाज, 14 क्रू मेंबर्स की बची जान, भारत ने जताया कड़ा विरोध

Praggya Singh sabal4 August 20262 min read78 viewsIndia
Red Sea Attack: यमन के पास डूबा भारतीय जहाज, 14 क्रू मेंबर्स की बची जान, भारत ने जताया कड़ा विरोध

लाल सागर के पास एक बड़ी समुद्री घटना सामने आई है, जहाँ MSV Faize Noore Oliya नाम का एक भारतीय कमर्शियल जहाज हमले का शिकार हो गया। यह घटना 4 अगस्त 2026 को यमन के पश्चिमी तट के पास घटी, जब एक विस्फोटक से लदी नाव ने जहाज पर हमला कर दिया। इस हमले के कारण जहाज पलट गया और समुद्र में डूब गया, जिससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। राहत की बात यह रही कि जहाज पर सवार 14 क्रू मेंबर्स, जिनमें 13 भारतीय और एक यमनी नागरिक शामिल थे, पूरी तरह सुरक्षित हैं।

सभी क्रू मेंबर्स सुरक्षित, यमनी अथॉरिटीज ने किया रेस्क्यू

जहाज डूबने की सूचना मिलते ही यमनी कोस्ट गार्ड और नेवी ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। सभी 14 लोगों को समय रहते बचा लिया गया और उन्हें सुरक्षित Port of Mokha तक पहुँचाया गया। यह हमला Al Hudaydah से लगभग 13 नॉटिकल मील दक्षिण में हुआ था। भारतीय दूतावास रियाद में इस पूरे मामले पर कड़ी नज़र रखे हुए है और यमनी अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए है ताकि सभी भारतीयों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जा सके।

भारत सरकार ने जताया कड़ा विरोध

भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। सरकार ने इसे 'बेहद चिंताजनक' करार देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में कमर्शियल शिपिंग को निशाना बनाना गलत है। भारत का स्पष्ट मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत समुद्री यातायात में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं होनी चाहिए और नेविगेशन की आजादी बनी रहनी चाहिए। इस मुद्दे पर अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक बयान देखा जा सकता है।

सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री Sarbananda Sonowal ने इस घटना को एक 'बिना उकसावे वाला हमला' बताया है। उन्होंने साफ कहा कि एक निहत्थे जहाज पर हमला करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मंत्री ने दोहराया कि भारतीय नाविकों की सुरक्षा सरकार के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता है और क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा करने के निर्देश दिए गए हैं। इस हमले के बारे में विस्तृत अपडेट अन्य खबरों में भी प्रमुखता से लिए गए हैं।

यमन की सरकारी नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज (NRF) ने हमले के पीछे हौथी समूह का हाथ होने का दावा किया है। हालांकि, हौथी गुट की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लाल सागर और Bab al-Mandab Strait में लगातार हो रहे ऐसे हमलों ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। हाल ही में तुर्की के राष्ट्रपति Recep Tayyip Erdogan और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस Mohammed bin Salman ने भी इन हमलों को लेकर चिंता जाहिर की और एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा गठबंधन बनाने के प्रयासों पर चर्चा की है।

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