Yemen तट पर डूबा भारतीय जहाज, विदेश मंत्रालय ने कहा- चालक दल की सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता

लाल सागर के पास यमन के तट पर एक भारतीय व्यापारिक जहाज के डूबने के बाद भारत सरकार ने अपने नाविकों की सुरक्षा को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। MSV Faize Noore Oliya नाम का यह जहाज 4 अगस्त 2026 को समुद्र में डूब गया था, जिसके बाद वहां मौजूद 14 क्रू मेंबर्स की जान बचाने के लिए फौरन रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। यमनी कोस्ट गार्ड की मदद से सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और उन्हें मोखा बंदरगाह तक पहुंचाया गया। इस घटना के बाद से ही भारतीय अधिकारी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं ताकि समुद्र में काम करने वाले हमारे लोगों को किसी भी तरह की परेशानी न हो।
विदेश मंत्रालय की कड़ी चेतावनी और कदम
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने 7 अगस्त 2026 को साफ तौर पर कहा कि भारतीय जहाजों और वहां काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा भारत सरकार के लिए सबसे ऊपर है। सरकार का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों पर आवाजाही बिना किसी बाधा के होनी चाहिए और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना गलत है। भारत ने सभी पक्षों से अपील की है कि वे आम नागरिकों, व्यापारिक जहाजों और समुद्री कर्मियों को अपना निशाना न बनाएं। यह घटना उस बढ़ते खतरे को दिखाती है जो पश्चिमी एशिया के मौजूदा हालातों की वजह से लाल सागर में समुद्री व्यापार के लिए बना हुआ है। यमन की सरकार से जुड़ी ताकतों ने इस हमले के पीछे हूती प्रशासन का हाथ बताया है।
सोनोवाल ने दिए सुरक्षा के सख्त निर्देश
केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री Sarbananda Sonowal ने इस घटना पर दुख और गुस्सा जाहिर करते हुए इसे बिना उकसावे का हमला बताया है। उन्होंने मैरीटाइम एडमिनिस्ट्रेशन के महानिदेशक को निर्देश दिया है कि वे भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तुरंत जरूरी कदम उठाएं। खाड़ी देशों में मौजूद भारतीय मिशन लगातार वहां की शिपिंग अथॉरिटीज के साथ संपर्क में हैं ताकि समुद्री रास्तों पर भारतीय जहाजों की आवाजाही सुरक्षित रहे।
प्रवासियों और नाविकों के लिए हेल्पलाइन
इस संकट के समय में भारतीय दूतावास और मिशन पूरी तरह अलर्ट हैं। Riyadh स्थित भारतीय दूतावास लगातार यमनी अधिकारियों के साथ मिलकर स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है। सरकार ने नाविकों और उनके परिवारों की मदद के लिए 24/7 हेल्पलाइन की सुविधा भी शुरू की है। जो भी भारतीय नागरिक या नाविक इन क्षेत्रों से जुड़े हैं, वे जरूरत पड़ने पर आधिकारिक माध्यमों से संपर्क कर सकते हैं। सरकार का साफ कहना है कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। अधिक जानकारी के लिए आप ANI News की रिपोर्ट देख सकते हैं।