इंडोनेशिया के उपराष्ट्रपति ने हाल ही में जुअंडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ‘मक्का रूट’ टर्मिनल का दौरा किया. यह प्रोग्राम हज यात्रियों की मुश्किलों को कम करने और उनके सफर को आसान बनाने के लिए शुरू किया गया है. इस पहल से अब यात्रियों को सऊदी अरब पहुँचने के बाद लंबी लाइनों और कागजी कार्रवाई में समय बर्बाद नहीं करना पड़ेगा.

मक्का रूट पहल क्या है और इससे यात्रियों को क्या फायदा होगा?

मक्का रूट प्रोग्राम सऊदी अरब के गृह मंत्रालय द्वारा चलाया जा रहा है, जो सऊदी विजन 2030 के तहत एक बड़ा प्रोजेक्ट है. इस सुविधा के तहत यात्री अपने ही देश के एयरपोर्ट पर बायोमेट्रिक डेटा दे सकते हैं और ई-वीजा बनवा सकते हैं. पासपोर्ट कंट्रोल और स्वास्थ्य जाँच की प्रक्रिया भी यहीं पूरी हो जाती है. सबसे बड़ी सुविधा यह है कि सामान को टैग करके सीधे मक्का और मदीना के होटलों में पहुँचा दिया जाता है. जब यात्री सऊदी अरब पहुँचते हैं, तो उन्हें सीधे बसों में बिठाकर उनके रहने की जगह पर भेज दिया जाता है, जिससे उनकी थकान कम होती है.

किन देशों में लागू है यह नियम और कौन से एयरपोर्ट शामिल हैं?

साल 2026 में यह सुविधा इंडोनेशिया, पाकिस्तान, मलेशिया, बांग्लादेश, तुर्किये, मोरक्को, आइवरी कोस्ट, मालदीव, सेनेगल और ब्रुनेई जैसे 10 देशों में उपलब्ध है. इंडोनेशिया में जकार्ता, सोलो, सुरबाया और मकासर के एयरपोर्ट पर यह व्यवस्था काम कर रही है. इंडोनेशिया के हज और उमराह मंत्री डॉ. मोहम्मद इरफान यूसुफ ने 28 अप्रैल 2026 को इस टर्मिनल का दौरा किया और इसे दोनों देशों के बीच एक बड़ा रणनीतिक सहयोग बताया. यह प्रोग्राम यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने और सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए लागू किया गया है.

Frequently Asked Questions (FAQs)

सुरबाया से मक्का रूट की पहली फ्लाइट कब रवाना हुई?

सुरबाया के जुअंडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से मक्का रूट पहल का लाभ लेने वाली पहली फ्लाइट 22 अप्रैल 2026 को सऊदी अरब के लिए रवाना हुई थी.

सऊदी अरब में यात्रियों के उतरने के मुख्य पॉइंट्स कौन से हैं?

इस पहल के तहत यात्री मुख्य रूप से मदीना के प्रिंस मोहम्मद बिन अब्दुलअज़ीज़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट और जेद्दा के किंग अब्दुलअज़ीज़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरते हैं.