इंदौर एयरपोर्ट सुरक्षा में बड़ी चूक, सोना तस्करी के खेल में एयरलाइंस कर्मचारी और कस्टम अधिकारी की मिलीभगत आई सामने

Praggya Singh sabal6 August 20262 min read65 viewsIndia
इंदौर एयरपोर्ट सुरक्षा में बड़ी चूक, सोना तस्करी के खेल में एयरलाइंस कर्मचारी और कस्टम अधिकारी की मिलीभगत आई सामने

हवाई अड्डे पर सुरक्षा के नाम पर यात्रियों को घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ता है, लेकिन इंदौर के देवी अहिल्याबाई होलकर हवाई अड्डे पर सुरक्षा की असलियत कुछ और ही सामने आई। हाल ही में हुए एक खुलासे ने यह साबित कर दिया है कि हवाई अड्डे की कड़ी जांच और सुरक्षा व्यवस्था के भीतर एक गंभीर सेंध लग चुकी है। अबू धाबी से आई एक फ्लाइट के जरिए चांदी की परत चढ़ाकर लगभग एक किलो सोना तस्करी करके लाया गया। इस मामले की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि सोना किसी यात्री के बैग में नहीं, बल्कि सीधे तौर पर एयर इंडिया एक्सप्रेस के कर्मचारी को एयरोब्रिज पर ही सौंप दिया गया।

सुरक्षा व्यवस्था और भरोसे की टूटती नींव

हवाई अड्डे पर सुरक्षा की जिम्मेदारी जिन हाथों में होती है, उन्होंने ही इस मामले में कानून के साथ खिलवाड़ किया है। टैरमैक से उतरकर सुरक्षा व्यवस्था को चकमा देना और इसमें कस्टम अधिकारी की मिलीभगत होना किसी बड़ी चूक से कम नहीं है। जब वर्दी पहने लोग ही अपनी ईमानदारी को दस हजार रुपये के छोटे से लालच के लिए गिरवी रख दें, तो फिर यात्रियों द्वारा की जाने वाली सुरक्षा जांच का क्या महत्व रह जाता है। आम यात्री अपनी जेबें खाली करता है, जूते-बेल्ट उतारता है और लैपटॉप जैसी चीजों को ट्रे में रखता है, ताकि वह खुद को सुरक्षित महसूस कर सके। लेकिन जब सुरक्षा के रक्षक ही अपराधी बन जाएं, तो यह आम आदमी के भरोसे का अपमान है।

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तकनीक बनाम मानवीय ईमानदारी

आज के दौर में हवाई अड्डों पर करोड़ों के स्कैनर, आधुनिक सीसीटीवी कैमरे और डिजिटल निगरानी तंत्र लगे हुए हैं। इसके बावजूद चांदी की परत चढ़ाकर तस्करी का होना यह दर्शाता है कि आधुनिक मशीनें भी मनुष्य की बेईमानी के सामने बेबस हैं। सुरक्षा का असली लूपहोल मशीनों में नहीं, बल्कि व्यवस्था में शामिल उन लोगों के चरित्र में है जो अपनी जिम्मेदारी को सही से नहीं निभा रहे हैं। इस घटना ने साबित किया कि सुरक्षा व्यवस्था का ढांचा कितना भी मजबूत क्यों न हो, अगर उसे संभालने वाले हाथ ईमानदार नहीं हैं, तो कोई भी दीवार सुरक्षित नहीं रह सकती।

प्रवासियों और यात्रियों पर पड़ता सीधा असर

खाड़ी देशों से मेहनत की कमाई लेकर लौटने वाले मजदूर हों या विदेश पढ़ने जाने वाले छात्र, सभी हवाई अड्डे पर एक ही तरह की सख्त तलाशी से गुजरते हैं। उनके लिए हवाई अड्डा केवल यात्रा का साधन नहीं, बल्कि सुरक्षित पहुंचने का एक जरिया है। जब सुरक्षा व्यवस्था के भीतर से ही तस्करी का रास्ता खुलता है, तो आम यात्री का सुरक्षा जांच पर से विश्वास कम होने लगता है। उसे लगने लगता है कि जो जांच उसे सुरक्षा का अहसास कराती थी, वह अब केवल एक औपचारिकता बनकर रह गई है। सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने की आवश्यकता है, जिसमें कर्मचारियों की नियमित सत्यनिष्ठा जांच (integrity check) और संवेदनशील पदों पर बदलाव शामिल होना चाहिए। यदि व्यवस्था को खुद के प्रति जवाबदेह नहीं बनाया गया, तो यात्रियों का भरोसा पूरी तरह टूट जाएगा।

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