इंडसइंड इंटरनेशनल होल्डिंग्स लिमिटेड (IIHL) के चेयरमैन अशोक हिंदुजा ने मंगलवार को कहा कि इंडसइंड बैंक ने किसी भी तरह की नई पूंजी अपने प्रमोटरों से नहीं मांगी है, भले ही बैंक को हाल ही में अकाउंटिंग गड़बड़ी के चलते शुद्ध संपत्ति (Net Worth) में भारी नुकसान उठाना पड़ा हो।

IIHL को हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से इंडसइंड बैंक में अपनी हिस्सेदारी 16 प्रतिशत से बढ़ाकर 26 प्रतिशत तक करने की मंजूरी मिली है।

पूंजी की स्थिति फिलहाल मजबूत

अशोक हिंदुजा ने कहा कि जरूरत पड़ने पर IIHL बैंक में पूंजी डालने के लिए तैयार है, लेकिन फिलहाल बैंक की पूंजी पर्याप्तता (Capital Adequacy) 15 प्रतिशत से ज्यादा है और बैंक ने कोई नया फंड नहीं मांगा है।

शेयर मूल्य गिरावट को अवसर मान रहे प्रमोटर

हिंदुजा ने कहा कि शेयर की कीमत में गिरावट के इस मौके का फायदा उठाकर प्रमोटर्स अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना चाहते हैं। उन्होंने कहा:

“ऐसे समय में, जब कीमतें गिरी हों और पैनिक हो, तब अवसर होता है। बुक वैल्यू और नेट वर्थ देखें — यह घबराने वाली स्थिति है, और ऐसी स्थिति में निवेशकों को मौके मिलते हैं।”

कहां से शुरू हुई समस्या?

10 मार्च को, इंडसइंड बैंक ने अपनी डेरिवेटिव पोर्टफोलियो में कुछ गड़बड़ियों का खुलासा किया था, जिससे दिसंबर 2024 तक बैंक की नेट वर्थ पर 2.35 प्रतिशत का नकारात्मक असर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह गड़बड़ी करीब 2,100 करोड़ रुपये की है। इस खबर के बाद बैंक के शेयर में बड़ी गिरावट देखने को मिली।

PwC कर रहा ऑडिट

अशोक हिंदुजा ने बताया कि बैंक ने PwC को ऑडिट के लिए नियुक्त किया है, जो यह पता लगाएगा कि इस गड़बड़ी के लिए कौन जिम्मेदार है। ऑडिट रिपोर्ट मार्च 2024 के अंत तक आने की उम्मीद है।

CFO के इस्तीफे और CEO को केवल 1 साल का एक्सटेंशन पर जवाब नहीं

हिंदुजा ने बैंक के CFO गोविंद जैन के इस्तीफे और सीईओ सुमंत कथपालिया को केवल एक साल के एक्सटेंशन दिए जाने के पीछे के कारणों पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

Lov Singh

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