23 देशों ने मिलकर ईरान पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ गया है। अमेरिका और ब्रिटेन समेत कई देशों ने दावा किया है कि ईरान विदेशों में खतरनाक साजिशें रच रहा है। इस मामले पर अब ईरान की सरकार ने तीखा जवाब देते हुए इन सभी आरोपों को खारिज कर दिया है।

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23 देशों ने ईरान पर क्या आरोप लगाए

अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया समेत 23 देशों ने 10 जून 2026 को एक साझा बयान जारी किया। इन देशों ने ईरान के IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स), Quds Force और खुफिया मंत्रालय पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

  • बयान में कहा गया कि ईरान यूरोप, उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में घातक साजिशें रच रहा है।
  • आरोप है कि ईरान ने अपने विरोधियों, पत्रकारों और यहूदी समुदायों को निशाना बनाया है।
  • इन देशों ने यह भी कहा कि HAYI नाम का एक ग्रुप, जिसका संबंध ईरान से है, उसने यूरोप में कई हमले किए हैं।
  • सभी सदस्य देशों ने मांग की है कि ईरान तुरंत ऐसी हरकतों को बंद करे क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन हो रहा है।

ईरान ने आरोपों को बताया राजनीतिक साजिश

ईरान के डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर Kazem Gharibabadi ने इस साझा बयान को पूरी तरह गलत बताया है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक राजनीतिक ऑपरेशन है ताकि दुनिया का ध्यान उन देशों की अपनी गलतियों और कब्जों से हटाया जा सके।

Gharibabadi ने साफ किया कि ईरान किसी भी तरह की हत्या, अपहरण या डराने-धमकाने जैसी गैरकानूनी गतिविधियों का समर्थन नहीं करता है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन देशों ने ईरान पर आरोप लगाए हैं, उनका खुद का रिकॉर्ड खराब है और उन्हें दूसरों को नसीहत देने का कोई कानूनी या नैतिक अधिकार नहीं है।

ईरान की चेतावनी और कड़ा रुख

ईरान की सरकार ने चेतावनी दी है कि अगर उसके खिलाफ कोई भी गलत कदम उठाया गया या बिना सबूत के आरोप लगाए गए, तो इसका जवाब बहुत सख्त होगा। Gharibabadi ने कहा कि ईरान अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के साथ कोई समझौता नहीं करेगा और किसी भी हमले का उचित और कानूनी जवाब दिया जाएगा।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.