ईरान और जर्मनी के बीच तनाव बहुत बढ़ गया है। ईरान ने जर्मनी पर सैन्य हमले में साथ देने और युद्ध अपराध करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। यह पूरा विवाद Strait of Hormuz में जहाजों के रास्ते और वहां बिछी बारूदी सुरंगों (mines) को हटाने को लेकर शुरू हुआ है।

मामले की शुरुआत 6 जुलाई 2026 को हुई जब जर्मनी के विदेश मंत्री Johann Wadephul ने एक बयान दिया। उन्होंने कहा कि Strait of Hormuz से बारूदी सुरंगें हटाने के लिए जो भी अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन होगा, उसका खर्च अंत में ईरान को ही उठाना होगा। उन्होंने साफ़ कहा कि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ते में गैरकानूनी तरीके से सुरंगें बिछाई हैं, इसलिए उसे ही इसका भुगतान करना चाहिए।

ईरान का तीखा जवाब

जर्मनी के इस बयान पर ईरान के विदेश मंत्रालय ने कड़ी नाराजगी जताई है। ईरान के प्रवक्ता ने इस बयान को हकीकत को पूरी तरह तोड़-मरोड़ कर पेश करना बताया। उन्होंने जर्मनी के रुख को बेहद शर्मनाक कहा और इसकी तुलना मशहूर नाटक फॉस्ट के एक किरदार मेफिस्टोफेल्स से की।

ईरान ने मांग की है कि जर्मनी को सैन्य आक्रामकता और गैरकानूनी युद्ध में उसकी भूमिका के लिए पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया जाए। ईरान का कहना है कि जर्मनी ने युद्ध अपराध किए हैं और उसे इसकी भारी कीमत चुकानी होगी।

क्षेत्र में सैन्य हलचल

इस विवाद के बीच जर्मनी ने पहले ही अपने दो जहाजों, Fulda और Mosel को इस क्षेत्र में तैनात किया है, जो फिलहाल जिबूती में खड़े हैं। जर्मनी के रक्षा मंत्री Boris Pistorius ने इन जहाजों को वापस बुलाने पर भी विचार किया है।

दूसरी ओर, ब्रिटेन और फ्रांस कुछ ही दिनों में एक बहुराष्ट्रीय नौसैनिक बल का नेतृत्व करने वाले हैं। इस मिशन का मकसद सुरंगों को हटाना और कमर्शियल जहाजों को सुरक्षित रास्ता देना है। इस ऑपरेशन में जर्मनी, नीदरलैंड, बेल्जियम और नॉर्वे समेत 10 से ज्यादा नाटो सदस्य देश अपने युद्धपोत भेज सकते हैं।

ईरान की चेतावनी

ईरान ने बाहरी ताकतों को यहां दखल न देने की चेतावनी दी है। ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने कहा कि Strait of Hormuz बाहरी शक्तियों के लिए अपनी सैन्य ताकत दिखाने की जगह नहीं है। उन्होंने साफ़ किया कि इस समुद्री रास्ते की सुरक्षा की जिम्मेदारी सिर्फ उन्हीं देशों की है जो इसके किनारे बसे हैं।

इसके अलावा, ईरान के सैन्य कमांड ने 2 और 3 जुलाई को चेतावनी दी थी कि सभी तेल टैंकरों को ईरान द्वारा तय किए गए रास्तों पर ही चलना होगा। अगर कोई जहाज इन नियमों का पालन नहीं करता या अमेरिकी सेना इसमें दखल देती है, तो ईरान उसकी तरफ कड़ा और निर्णायक एक्शन लेगा।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com