ईरान ने NATO, इटली और रोमानिया पर बहुत गंभीर आरोप लगाए हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय का कहना है कि इन देशों ने मिलकर ईरान के खिलाफ एक गैरकानूनी युद्ध छेड़ा है। ईरान के मुताबिक यह संयुक्त राष्ट्र के नियमों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सीधा उल्लंघन है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने 24 और 25 जून 2026 को बयान दिया कि NATO और उसके सदस्य देश इस हमले के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने साफ तौर पर इटली और रोमानिया का नाम लिया और कहा कि इन देशों ने अमेरिका और इसराइल के हमलों में मदद की है। ईरान ने मांग की है कि इन देशों को उनके किए की सजा मिलनी चाहिए।
इटली और रोमानिया की भूमिका पर सवाल
जानकारी के मुताबिक, NATO के सेक्रेटरी जनरल Mark Rutte ने बताया कि इटली ने अपनी जमीन पर मौजूद अमेरिकी बेस से लगभग 500 विमानों को ‘Operation Epic Fury’ के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी। इसी तरह, रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट में कमर्शियल फ्लाइट्स को कम किया गया ताकि अमेरिकी टैंकर विमानों को वहां जगह मिल सके।
दूसरी तरफ, इटली के विदेश मंत्री Antonio Tajani ने कहा कि अगर ईरान ने परमाणु हथियार बनाने की कोशिश की, तो इटली इसे बर्दाश्त नहीं करेगा और इसे एक ‘रेड लाइन’ माना जाएगा।
शहरों में तबाही और मासूमों की मौत
ईरान का दावा है कि इन हमलों की वजह से उनके कई शहरों में भारी तबाही हुई है। इनमें मुख्य रूप से ये शहर शामिल हैं:
- तेहरान, इसफहान और शिराज
- तबरीज़, हमदान और सनंदाज
- मिनाब, लामर्ड और बंदर अब्बास
सबसे दुखद घटना फरवरी 2026 में मिनाब शहर में हुई, जहां एक लड़कियों के स्कूल पर मिसाइल हमला हुआ। इस हमले में 168 से ज्यादा छात्राएं और टीचर मारे गए। ईरान के UN एंबेसडर Saeed Iravani ने इस घटना की कड़ी निंदा की और इसे आम नागरिकों पर जानबूझकर किया गया हमला बताया।
कानून और आत्मरक्षा की बात
ईरान का कहना है कि ये हमले UN चार्टर के आर्टिकल 2(4) का उल्लंघन हैं, जो किसी भी देश की आजादी या उसकी जमीन पर हमले को रोकता है। ईरान ने यह भी साफ किया है कि वह आर्टिकल 51 के तहत अपनी रक्षा करने का पूरा हक रखता है और हमला करने वाले ठिकानों को निशाना बना सकता है।
