ईरान और अमेरिका-इसराइल के बीच चल रहे युद्ध ने अब नया मोड़ ले लिया है। ईरान ने NATO पर सीधा आरोप लगाया है कि वह इस युद्ध में सक्रिय रूप से शामिल है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने यूरोपीय सहयोगियों पर गुस्सा जाहिर किया है क्योंकि उन्हें उम्मीद के मुताबिक सैन्य मदद नहीं मिली।

🚨: Saudi Arabia Travel Update: इबोला का खतरा, सऊदी अरब ने डीआरसी, युगांडा और दक्षिण सूडान से आने वालों पर लगाए कड़े नियम

ईरान के गंभीर आरोप

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने X पर एक बयान जारी किया। उन्होंने NATO पर एक संप्रभु देश के खिलाफ अवैध युद्ध चलाने में साथ देने का आरोप लगाया। Baghaei ने कहा कि इस तरह के फैसले लेने वाले NATO और उसके सदस्य देशों को आने वाले सभी परिणामों के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।

ट्रंप ने यूरोपीय देशों को फटकारा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 24 जून 2026 को व्हाइट हाउस में NATO प्रमुख Mark Rutte से मुलाकात की। इस दौरान ट्रंप ने इटली, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों की आलोचना की क्योंकि उन्होंने ईरान के खिलाफ युद्ध में पर्याप्त सहयोग नहीं दिया। ट्रंप ने स्पेन के रवैये को “हॉरर शो” बताया क्योंकि स्पेन ने अपने सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल ईरान पर हमलों के लिए करने से इनकार कर दिया था। ट्रंप ने कहा कि हालांकि अमेरिका को मदद की जरूरत नहीं थी, लेकिन अगर सहयोगी देश आगे आते तो यह अच्छा होता।

NATO का दावा और देशों की सच्चाई

तनाव को कम करने के लिए NATO प्रमुख Mark Rutte ने बताया कि “Operation Epic Fury” के दौरान यूरोपीय देशों ने अमेरिका की मदद की थी। उन्होंने दावा किया कि करीब 4,000 से 5,000 अमेरिकी विमानों ने यूरोपीय ठिकानों का उपयोग किया। Rutte के मुताबिक, इटली से लगभग 500 विमान उड़ान भर रहे थे और रोमानिया ने अमेरिकी टैंकर सुविधाओं के लिए कमर्शियल हवाई ट्रैफिक को कम किया था।

हालांकि, इटली के रक्षा मंत्रालय ने Rutte की बात को गलत बताया। इटली ने साफ किया कि उसने केवल तकनीकी और लॉजिस्टिक मदद दी थी और किसी भी तरह के कॉम्बैट मिशन या हमले की अनुमति नहीं दी थी।

ज्यादातर यूरोपीय देशों ने ट्रंप के सैन्य अभियान का समर्थन तो किया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला देते हुए सक्रिय युद्ध में शामिल होने से मना कर दिया। ब्रिटेन ने अपने डिगो गार्सिया (Diego Garcia) बेस का इस्तेमाल सिर्फ रक्षात्मक कामों के लिए करने दिया, जबकि स्पेन और फ्रांस ने अपने एयरबेस इस्तेमाल करने की अनुमति बिल्कुल नहीं दी।