ईरान के संयुक्त राष्ट्र (UN) दूत अमीर सईद इरावानी ने 6 अरब देशों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि इन देशों ने अपनी जमीन पर अमेरिका और इसराइल के सैन्य ठिकाने बनाकर ईरान के खिलाफ हमलों में मदद की। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपनी रक्षा के लिए कोई भी कदम उठा सकता है और मददगार देशों को इसका जवाब देना होगा।

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ईरान ने 6 अरब देशों पर क्या आरोप लगाए हैं?

संयुक्त राष्ट्र में दिए बयान के दौरान अमीर सईद इरावानी ने कहा कि 6 अरब देशों ने अपनी जमीन, हवाई क्षेत्र और समुद्री रास्तों का इस्तेमाल अमेरिका और इसराइल को करने दिया। इन सैन्य ठिकानों की मदद से ही ईरान पर हवाई हमले किए गए। ईरान ने इन देशों को इस हमले में शामिल माना है और चेतावनी दी है कि जो देश हमलों में मदद करेंगे उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जवाबदेह ठहराया जाएगा।

ईरान ने अपनी सैन्य कार्रवाई को सही क्यों बताया?

ईरान का कहना है कि उसने यह संघर्ष शुरू नहीं किया था। उसने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के आर्टिकल 51 का हवाला दिया, जो किसी भी देश को अपनी रक्षा करने का कानूनी अधिकार देता है। इरावानी ने स्पष्ट किया कि ईरान के सैन्य कदम पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार थे और यह केवल अपनी रक्षा करने का एक तरीका था।

अमेरिका और इसराइल की इसमें क्या भूमिका है?

ईरान के मुताबिक अमेरिका और इसराइल ने अरब देशों में मौजूद बेस का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए किया। इस मामले में एक दिलचस्प मोड़ यह है कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन का दावा है कि अमेरिका ईरान के साथ युद्ध में नहीं है। हालांकि, अमेरिका में वॉर पावर्स एक्ट की एक कानूनी समय सीमा करीब आ रही है, जिससे यह मामला और गंभीर हो गया है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान ने किन देशों पर आरोप लगाया है?

ईरान ने 6 अरब देशों पर आरोप लगाया है। हालांकि ताजा रिपोर्ट में नाम नहीं हैं, लेकिन पुरानी खबरों के अनुसार इसमें सऊदी अरब, UAE, बहरीन, कतर और जॉर्डन जैसे देश शामिल हो सकते हैं।

ईरान ने किस नियम के तहत अपनी कार्रवाई को सही कहा?

ईरान ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के आर्टिकल 51 का हवाला दिया है, जो किसी भी सदस्य देश को सशस्त्र हमले की स्थिति में आत्मरक्षा का अधिकार देता है।