ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुँच गया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उसने बिना किसी उकसावे के यह युद्ध शुरू किया। ईरान का मानना है कि अमेरिकी प्रशासन ने इस युद्ध को अपनी मर्जी से चुना और अब इसे आत्मरक्षा बताकर दुनिया को गुमराह कर रहा है।

ईरान ने अमेरिका पर क्यों लगाए गंभीर आरोप?

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने सोशल मीडिया पर साफ़ कहा कि अमेरिका का यह कदम एक स्पष्ट आक्रमण था। उन्होंने कहा कि अमेरिकी जनता को यह अधिकार है कि वह अपनी सरकार से इस अवैध युद्ध के लिए जवाब मांगे। Baqaei ने अमेरिका के उस दावे को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि यह कार्रवाई इजराइल की मदद और आत्मरक्षा के लिए की गई थी।

पैसों का विवाद और शांति प्रस्ताव की स्थिति

इस विवाद में अब पैसों की बात भी सामने आई है। ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने पेंटागन के खर्चों पर सवाल उठाए हैं। ईरान का दावा है कि अमेरिका ने इस युद्ध में 100 बिलियन डॉलर से ज़्यादा खर्च किए, जबकि अमेरिकी अधिकारियों ने इसे केवल 25 बिलियन डॉलर बताया था। दूसरी तरफ, पाकिस्तान की मदद से अमेरिका को शांति वार्ता का एक नया प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि वह इस प्रस्ताव से खुश नहीं हैं।

व्हाइट हाउस और कानूनी पेंच का मामला

युद्ध को लेकर अमेरिका के अंदर भी कानूनी खींचतान चल रही है। व्हाइट हाउस ने अमेरिकी कांग्रेस को एक पत्र लिखकर जानकारी दी कि ईरान के साथ शत्रुता अब खत्म हो गई है। यह कदम 1 मई की उस कानूनी समय सीमा से बचने के लिए उठाया गया, जिसके तहत युद्ध को आगे बढ़ाने के लिए कांग्रेस की मंजूरी लेना ज़रूरी था। वहीं, ईरान का कहना है कि अमेरिका का परमाणु मुद्दों और प्रतिबंधों को लेकर कोई गंभीर रवैया नहीं है, जिससे दोनों देशों के बीच भरोसा कम हुआ है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या ईरान और अमेरिका के बीच सीधी बातचीत हुई है?

नहीं, अभी तक कोई सीधी बातचीत नहीं हुई है। ईरान ने पाकिस्तान के ज़रिए अपना शांति प्रस्ताव अमेरिका तक पहुँचाया है।

युद्ध के खर्च को लेकर विवाद क्या है?

अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने खर्च 25 बिलियन डॉलर बताया है, जबकि ईरान के विदेश मंत्री का दावा है कि यह खर्चा 100 बिलियन डॉलर से ज़्यादा है।